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तमिलनाडु में चुनावी हलचल तेज, कांग्रेस ने DMK के खिलाफ बयान न देने की दी सलाह

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तमिलनाडु में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल। फाइल फोटो



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में लचर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस में अगले दो-तीन महीने में होने वाले पांच राज्यों के चुनाव में सियासी हालात बदलने को लेकर बेचैनी बढ़ती दिखाई दे रही है।

विशेषकर केरल, असम तथा तमिलनाडु के चुनाव के संदर्भ में जहां पार्टी को गठबंधन सहयोगियों के साथ सत्ता की उम्मीद दिखाई दे रही है। इसके मद्देनजर ही कांग्रेस हाईकमान द्वारा तमिलनाडु के के अपने नेताओं को राज्य में द्रमुक के साथ गठबंधन में सीटों की संख्या से लेकर सत्ता में हिस्सेदारी जैसे नीतिगत मामलों में बयानबाजी पर स्पष्ट रोक लगा दी गई है।

प्रदेश नेताओं को साफ कह दिया गया है कि चाहे द्रमुक से सीट बंटवारे का मसला हो या गठबंधन के स्वरूप का इन सब पर अंतिम फैसला हाईकमान करेगा। इस निर्देश के साथ ही प्रदेश नेताओं को द्रमुक के साथ ही चुनावी मैदान में उतरने की सियासी तस्वीर साफ कर दी गई है।
कांग्रेस ने बुलाई बैठक

तमिलनाडु कांग्रेस के नेताओं तथा द्रमुक नेताओं के बीच सत्ता में हिस्सेदारी की मांग को लेकर बढ़ते सियासी तनातनी के बीच कांग्रेस हाईकमान ने शनिवार शाम प्रदेश के तमाम वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई। द्रमुक के साथ चुनावी तालमेल से जुड़े सारे मामलों पर फैसला अपने स्तर पर करने का निर्णय लेते हुए पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश नेताओं को अनुशासन बनाए रखते हुए एक सुर में बोलने की नसीहत दी। साथ ही द्रमुक से सत्ता में हिस्सेदारी देने या सीटों की संख्या के संदर्भ में किसी तरह की सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करने का निर्देश दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के साथ चार घंटे से भी अधिक चली इस बैठक में पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष के सेल्वपेरुथगाई, वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम, मणिक्कम टैगोर, कार्ति चिदंबरम, ज्योतिमणि समेत राज्य से पार्टी के सभी सांसद तथा प्रोफेशनल्स कांग्रेस के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती आदि प्रमुख नेता मौजूद थे।
कांग्रेस हाईकमान करेगा बात

इस बैठक के बाद वेणुगोपाल के दिए बयान से भी स्पष्ट है कि कांग्रेस हाईकमान ही द्रमुक के शीर्ष नेतृत्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से बातचीत कर गठबंधन के आपसी मसलों का समाधान निकालेगा। जैसा वेणुगोपाल ने कहा भी कि तमिलनाडु के नेताओं ने सर्वसम्मति से मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को चुनाव रणनीति और संबंधित मामलों पर फैसले लेने का अधिकार दिया है।

चुनाव को लेकर हाईकमान पार्टी की विचारधारा और राज्य के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सही समय पर उचित फैसले लेगा। वेणुगोपाल ने प्रदेश नेताओं को अटकलों से बचने के साथ सोशल मीडिया या सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करने के लिए जारी निर्देश की भी पुष्टि की। बताया जाता है कि बैठक के दौरान प्रवीण चक्रवर्ती जैसे कुछ नेताओं को द्रमुक सरकार को लेकर की गई प्रतिकूल टिप्पणी को लेकर हाईकमान ने सख्त नसीहत देते हुए ऐसा नहीं करने का निर्देश दिया गया।
सीटों के बंटवारे पर फंसा पेंच

तमिलनाडु में द्रमुक से कांग्रेस का दो दशक से भी अधिक पुराना गठबंधन है मगर पार्टी राज्य की सत्ता में सहयोगी दलों को भागीदारी नहीं देती। जबकि प्रदेश कांग्रेस के नेता अब इस स्थिति को बदलने की हिमायत करते हुए द्रमुक से न केवल सत्ता में हिस्सेदारी देने की मांग कर रहे बल्कि विधानसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर भी दबाव बना रहे।

द्रमुक ने 2021 के चुनाव में कांग्रेस को अब तक की सबसे कम केवल 25 सीटें ही दी थी जिसमें से पार्टी ने 17 सीटें जीती थी। बताया जा रहा कि द्रमुक अगले चुनाव में कांग्रेस को कुछ अधिक सीटें देने को तैयार है मगर सत्ता में हिस्सेदारी की मांग को स्वीकार करने के लिए बिल्कुल राजी नहीं है।
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