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प्रदूषण कम करने में चीन ने चौंकाया, 10 साल में बीजिंग का PM2.5 हुआ आधा; क्या है भारत के शहरों का हाल?

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10 साल में बीजिंग ने PM 2.5 आधा किया भारत की औसत हवा में नहीं आई खास सुधार (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वायु प्रदूषण ना सिर्फ भारत के लिए बड़ी परेशानी है, बल्कि विश्व भर के कई देश इस परेशानी का सामना कर रहे हैं। उन्हीं में से एक चीन भी है। लेकिन, पिछले एक दशक में वायु प्रदूषण से निपटने के मामले में चीन और भारत के बीच बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है।

ताजा विश्लेषण के अनुसार, चीन की राजधानी बीजिंग ने बीते 10 वर्षों में वायु प्रदूषण को कम करने और PM2.5 के स्तर को नियंत्रित करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। बीजिंग में PM2.5 प्रदूषण को आधे से भी ज्यादा घटा लिया गया है। लेकिन, भारत का औसत स्तर जस का तस बना हुआ है।
चीन ने किए चौंकाने वाले सुधार

वैश्विक स्तर पर साल 2011 से लेकर 2022 तक PM2.5 प्रदूषण में करीब 10% तक की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, चीन ने इस मामले पर सबसे ज्यादा चौंकाने वाले सुधार करते हुए PM2.5 प्रदूषण के स्तर को 32% तक की कमी की है। लेकिन, इसके उलट भारत का औसत मात्र 0.4 प्रतिशत ही घट पाया।

डेटा के मुताबिक, साल 2013 से लेकर 2022 तक दुनिया में PM2.5 में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाले दुनिया के शीर्ष 10 शहरों में से 9 चीन के हैं। बीजिंग में PM2.5 स्तर में 52 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसके अलावा तांगशान, लुओहे, जिनान, शूचांग और हानदान जैसे शहरों ने भी 40 से 50 प्रतिशत तक प्रदूषण घटाने में सफलता हासिल की है।

यह चीन की दीर्घकालिक नीतियों, सख्त नियमों और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था की ओर व्यापक बदलाव का नतीजा माना जा रहा है। भारत की तस्वीर हालांकि कहीं ज्यादा असमान है। राजधानी दिल्ली ने 2011 के बाद PM2.5 स्तर में लगभग 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद वह आज भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है।
भारत के किन शहरों में बढ़ा PM2.5 का स्तर?

वहीं, पुणे, सूरत और हैदराबाद जैसे शहरों में प्रदूषण का स्तर घटने के बजाय बढ़ा है। पुणे में PM2.5 स्तर में करीब 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो देश के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में तेजी से हो रहा शहरीकरण, वाहनों की बढ़ती संख्या और असमान नीति-कार्यान्वयन प्रदूषण नियंत्रण में बड़ी बाधा बने हुए हैं।
कैसे कम हो सकता है प्रदूषण?

राष्ट्रीय स्त पर ठोस और एकरूप रणनीति की कमी के कारण सुधार धीमा और बिखरा हुआ नजर आता है। विश्लेषण यह भी बताता है कि जहां 2011 में अधिकांश भारतीय शहर वैश्विक औसत से अधिक प्रदूषण दर्ज कर रहे थे, वहीं उसी समय कई चीनी शहरों में PM2.5 स्तर अपेक्षाकृत कम हो चुके थे। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर भारत को भी वायु गुणवत्ता में ठोस सुधार करना है, तो चीन की तरह दिर्घकालिक, सख्त और समन्वित नीतियों की जरूरत होगी।

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