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गांव या शहर कहां खाई गई सबसे ज्यादा पारले-जी, ब्रिटानिया बिस्किट को लेकर आई ये नई रिपोर्ट

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नई दिल्ली। Parle vs Britannia Results 2025: भारत के हर घर में चाय के साथ बिस्किट का एक खास रिश्ता है। लेकिन इस बार बिस्किट बाजार की दो सबसे बड़ी कंपनियों पारले (Parle) और ब्रिटानिया (Britannia) के नतीजे एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। जहां एक तरफ ब्रिटानिया ने अपनी बादशाहत कायम रखी है, वहीं पारले को मुनाफे के मोर्चे पर कमी आई है।
पारले: कमाई बढ़ी, लेकिन जेब हुई हल्की

\“पारले-जी\“ और \“मोनाको\“ बनाने वाली पारले प्रोडक्ट्स का रेवेन्यू (कमाई) 8.5% बढ़कर ₹15,568 करोड़ हो गया है। यानी लोगों ने बिस्किट तो खूब खरीदे, लेकिन कंपनी के मुनाफे में भारी गिरावट आई है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) 39% गिरकर सिर्फ ₹979.53 करोड़ रह गया है। टोफलर के डेटा के मुताबिक, कंपनी की कुल आय ₹16,190 करोड़ रही।
ब्रिटानिया का क्या रहा हाल?

दूसरी तरफ, शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने फिर साबित कर दिया कि वह मार्केट लीडर क्यों है। ब्रिटानिया ने वित्त वर्ष 2024-25 में ₹17,942 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पारले से काफी ज्यादा है। गुड डे, टाइगर और न्यूट्रीचॉइस जैसे प्रीमियम ब्रांड्स के दम पर ब्रिटानिया अभी भी रेस में सबसे आगे है। ब्रिटानिया का शेयर प्राइस में शुक्रवार को मामूली गिरावट देखने को मिली। यह 5,900 रुपये पर बंद हुआ।
गांव vs शहर की लड़ाई?

पारले हमेशा से \“मास मार्केट\“ (आम जनता और ग्रामीण भारत) की पसंद रहा है, जहां मार्जिन कम होता है। शायद यही वजह है कि कंपनी अब अपनी \“Platina Range\“ (प्रीमियम बिस्किट्स) को बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि मुनाफा बढ़ाया जा सके। वहीं, ब्रिटानिया पहले से ही प्रीमियम और डेयरी सेगमेंट में मजबूत पकड़ बनाए हुए है।

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