गैर-हिंदी भाषाओं के लिए तमिलनाडु का साहित्यिक पुरस्कार घोषित, स्टालिन ने केंद्र पर लगाया आरोप
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/18/article/image/stalin-(2)-1768751315321.webpगैर-हिंदी भाषाओं के लिए तमिलनाडु का साहित्यिक पुरस्कार घोषित (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजभाषा हिंदी के प्रति अपनी नफरत को एक बार फिर दर्शाते हुएतमिलनाडुकेमुख्यमंत्रीएमकेस्टालिननेसात गैर-हिंदी भारतीय भाषाओं के वार्षिक साहित्यिक पुरस्कारों की घोषणा की और साहित्य अकादमी पुरस्कारों में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के लिए केंद्र पर हमला किया।
तमिलनाडु सरकार के तत्वावधान में यह पुरस्कार तमिल समेत सात क्षेत्रीय भाषाओं में पांच लाख रुपये की नकद राशि के साथ दिया जाएगा। इसे \“\“सेमोजी इल्लाकिया विरुधु (क्लासिकल लैंग्वेज लिटरेरी अवार्ड)\“\“ नाम दिया गया है। पहले चरण में पुरस्कार तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओडि़या, बांग्ला और मराठी भाषाओं में सर्वश्रेष्ठ कृतियों के लिए दिए जाएंगे।
रविवार को चेन्नई अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले के समापन समारोह में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के कथित हस्तक्षेप के कारण रद कर दिया गया था। उन्होंने पुरस्कारों के प्रति अनिश्चितता को रेखांकित करते हुए कहा कि कला और साहित्य पुरस्कारों में राजनीतिक हस्तक्षेप खतरनाक है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
ऐसी परिस्थितियों में मुख्यमंत्री ने कहा कि कई लेखकों और साहित्यिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने उनसे उपयुक्त, रचनात्मक, प्रतिकारी योजना की अपील की थी। उन्होंने कहा कि हर साल तमिलनाडु सरकार की ओर से \“\“राष्ट्रीय स्तर\“\“ के पुरस्कार दिए जाएंगे, जो चयनित भारतीय भाषाओं में सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक कृतियों के लिए होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा, \“\“मैं इस घोषणा से बहुत खुश हूं। पहले चरण में सेमोजी इलाकिया विरुधु (क्लासिकल लैंग्वेज लिटरेरी अवार्ड) के नाम से पुरस्कार तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओडि़या, बांग्ला और मराठी भाषाओं में सर्वश्रेष्ठ कृतियों के लिए दिया जाएगा। प्रत्येक भाषा के लिए पुरस्कार में पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार होगा।\“\“
तमिलनाडु सरकार खुशी-खुशी संरक्षक की भूमिका निभाएगी और चयन प्रक्रिया का कार्य स्वतंत्र विशेषज्ञों को सौंपेगी। साहित्यिक कृतियों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक भाषा के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रतिष्ठित लेखक शामिल होंगे।
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