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ओडिशा में ई-चालान बना मजाक, ट्रक-बस-ऑटो पर भी कट रहा ‘बिना हेलमेट’ का जुर्माना

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अपना चालान दिखाते टैक्सी चालक। (जागरण)



संतोष कुमार पांडेय, अनुगुल। ओडिशा परिवहन विभाग का ई-चालान सिस्टम इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। पारदर्शिता और सटीक कार्रवाई के दावे के साथ लागू की गई यह डिजिटल व्यवस्था अब जनता के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।

राज्य के विभिन्न जिलों से ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जहां तीन पहिया ऑटो, छह पहिया ट्रक और यात्री बसों पर भी ‘बिना हेलमेट’ का चालान काट दिया गया। तकनीकी दौर में विभाग की इस लापरवाही ने कानून और तर्क दोनों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

भद्रक जिले के रामकृष्ण नाथ का मामला सबसे पहले चर्चा में आया, जब उनके ऑटो पर हेलमेट नहीं पहनने का ई-चालान काटा गया और यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद नयागढ़ जिले के महेश्वर बेहेरा पर भी 1500 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

महेश्वर पिछले 12 वर्षों से भुवनेश्वर में ऑटो चला रहे हैं, लेकिन विभाग के रिकॉर्ड में उन पर गंजाम जिले में ‘बिना हेलमेट’ वाहन चलाने का आरोप दर्ज है, जबकि वे उस समय वहां मौजूद ही नहीं थे।
ट्रक को दोपहिया वाहन समझ काटा चालान

यह लापरवाही यहीं तक सीमित नहीं रही बल्कि गंजाम जिले के प्रमोद कुमार स्वांई के छह पहिया ट्रक (ओआर-07डब्ल्यू-4593) को भी दोपहिया वाहन मानकर चालान काट दिया गया। इसी तरह कटक में एक यात्री बस के चालक को भी हेलमेट उल्लंघन के नाम पर जुर्माने का सामना करना पड़ा।

इन फर्जी चालानों की सबसे बड़ी मार गरीब और मध्यम वर्ग के वाहन चालकों पर पड़ रही है। नियमों के अनुसार जब तक जुर्माना जमा नहीं किया जाता, तब तक वाहन का परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और बीमा नवीनीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती। मजबूरी में चालकों को गलत चालान भी भरना पड़ रहा है या फिर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार ई-चालान में हो रही इन गलतियों के पीछे कई कारण हैं जिसमें स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरों की विफलता के कारण धूल, धुंध या खराब एंगल के कारण कैमरे नंबर प्लेट के अंकों को गलत पढ़ लेते हैं।

मैन्युअल सत्यापन के अभाव में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी स्तर पर बिना फोटो जांचे चालान को स्वीकृति दे दी जा रही है।
सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी के कारण भी समान नंबर श्रृंखला होने पर वाहन की श्रेणी पहचानने में गलती हो रही है, जिससे ऑटो, ट्रक और बस को भी दोपहिया वाहन मान लिया जा रहा है।
गरीबों की बढ़ा रहा मुश्किलें

गरीब चालकों के लिए 1000 से 1500 रुपये का जुर्माना कई दिनों की कमाई के बराबर है। ऊपर से कार्यालयों के चक्कर और दिहाड़ी का नुकसान उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है। आम लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि परिवहन विभाग की तकनीकी खामी की सजा जनता को आर्थिक और मानसिक रूप से क्यों भुगतनी पड़ रही है।

जनता की मांग है कि परिवहन विभाग ई-चालान प्रणाली की तत्काल समीक्षा करे, गलत चालानों को स्वतः निरस्त करे और मैन्युअल सत्यापन की व्यवस्था को मजबूत बनाए, ताकि तकनीक सुविधा बने, बोझ नहीं।

डिजिटल क्रांति का मकसद व्यवस्था को सुगम बनाना था, न कि शोषण का हथियार। ओडिशा में ट्रक और ऑटो पर हेलमेट का जुर्माना केवल एक \“तकनीकी खराबी\“ नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रमाण है। सरकार को चाहिए कि ऐसे गलत चालान काटने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करे, ताकि किसी और \“महेश्वर\“ को दफ्तरों की धूल न फांकनी पड़े।
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