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PHOTOS: ज्ञान के महाकुंभ में टूटे सभी रिकॉर्ड, करोड़ों का हुआ ऐतिहासिक कारोबार; 20 लाख से अधिक पाठक पहुंचे

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53वें विश्व पुस्तक मेले ने रिकॉर्ड तोड़ सफलता हासिल की।



संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। डिजिटल क्रांति के बावजूद पुस्तकें पढ़ने वालों की संख्या में कमी नहीं आई बल्कि वृद्धि ही हुई है। हर वर्ग और हर उम्र के लोग किताबें पढ़ना चाह रहे हैं। अब यह बात अलग है कि उनकी पसंद परंपरागत साहित्य पुस्तकों के साथ- साथ अपनी रूचि और जरूरत के अनुरूप व्यापक हो गई है।

एक समय था जब साहित्य का पर्याय मोटे- मोटे उपन्यास, कहानी संग्रह, जीवनियां, कविता संग्रह और निबंधात्मक पुस्तकें होती थीं। वक्त बदलने, सैटेलाइट चैनल आने एवं इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स आने के बाद एक समय ऐसा भी आया जब पुस्तकों की बिक्री एवं इन्हें पढ़ने दोनों के प्रति गिरावट आने लगी। पुस्तक मेलों में भी या तो बहुत ज्यादा दर्शक आते नहीं थे और आते भी थे तो उनमें किताबें खरीदने वालों की संख्या बहुत ही कम होती थी। लेकिन पिछले कुछ सालों में स्थितियां तेजी से बदली हैं।

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आज न केवल लोग पुस्तकें पढ़ना चाह रहे हैं बल्कि पुस्तकें खरीदना भी पसंद करने लगे हैं। इस बार विश्व पुस्तक मेले में जितनी भीड़ आई, देखते ही बनी। खास बात यह कि यह भीड़ केवल मेला घूमने वालों की नहीं रही, अपितु इसमें एक बड़ी संख्या पुस्तकें खरीदने वालों की भी थी।

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धार्मिक पुस्तकों के प्रति भी पाठकों का रूझान बढ़ा

यह बात अलग है कि आज का पाठक छोटी कहानियां या यूं कहें कि लघुकथा, सामयिक या चर्चित विषयों पर आधारित उपन्यास, शेराे शायरी, रोमांटिक या कटाक्ष करने वाली कविताएं, चर्चित हस्तियों से जुडे़ विषयों सहित अपनी जरूरत के मुताबिक पुस्तकें पढ़ना भी पसंद करता है। मसलन, योग, प्रबंधन, पाककला, हास्य व्यंग्य, बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य, आयुर्वेद, फिल्मों, व्यक्तित्व विकास इत्यादि। धार्मिक पुस्तकों के प्रति भी पाठकों का रूझान बढ़ा है। रामचरित मानस, गीता और पुराण भी अब खरीदे एवं पढ़ जा रहे हैं।

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प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार बताते हैं, पहले अगर मेला देखने 200 लोग आते थे तो उसमें से 20 लोग ही पुस्तकें खरीदते थे जबकि आज यह संख्या एक सौ से अधिक है। इसके अलावा आज मेले में आने वाले पाठक अपना एक बजट भी बनाकर चलते हैं कि उन्हें इतने रुपये तक की किताबें लेनी हैं।

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वहीं वाणी प्रकाशन के संचालक अरुण माहेश्वरी कहते हैं, इलेक्ट्रॉनिक गैजेटस के दौर में किताबें पढ़ी नहीं जाती...यह मिथक पहले से कमजोर था और अब तो टूट ही गया है। पुस्तकों की बिक्री भी बढ़ी है और पठन पाठन संस्कृति भी। जहां तक पसंद का सवाल है तो वह समयानुसार बदलती ही रहती है।
20 लाख से अधिक पाठक, करोड़ों का कारोबार

किताबों के प्रति दिल्ली एनसीआर वासियों का बढ़ता प्रेम कहें या कुछ और. लेकिन 53वें विश्व पुस्तक मेले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का रिकार्ड भी तोड़ दिया। मेला आयोजक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के मुताबिक नौ दिन के मेले में 20 लाख से अधिक पाठक पहुंचे। शनिवार और रविवार को तो लोग लंबी कतारों में दिखे। पुस्तकों की बिक्री का आंकड़ा भी करोड़ों में रहा।

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विभिन्न श्रेणियों के प्रकाशकों ने बताया कि निःशुल्क प्रवेश से दर्शक संख्या में वृद्धि हुई, पाठक वर्ग का विस्तार हुआ और बिक्री में 30 प्रतिशत का सुधार देखने को मिला। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने ही पिछले वर्ष के मेले के बनिस्पत इस साल अपनी बिक्री में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। प्रभात प्रकाशन में इस बार रिकार्ड करीब 40 लाख की बिक्री हुई है।

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जागरण की बेस्ट सेलर पुस्तक

दैनिक जागरण की बेस्ट सेलर सूची में शामिल युवा कवयित्री ऐश्वर्या शर्मा का काव्य संग्रह \“\“जाना जरूरी है क्या\“\“ भी मेले में पसंद किया गया। पंक्ति प्रकाशन से प्रकाशित इस संग्रह में जीवन के विविध पहलुओं पर 71 कविताएं और आखिर में 20 क्षणिकाएं हैं।2027 में 16 से 24 जनवरी के दौरान लगेगा अगला विश्व पुस्तक मेला 54वां विश्व पुस्तक मेला प्रगति मैदान में 16 से 24 जनवरी 2027 के दौरान आयोजित होगा।

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यह घोषणा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) के निदेशक युवराज मलिक ने रविवार को 53वें विश्व पुस्तक मेले के अंतिम दिन की। उन्होंने इसके सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करे हुए सभी आगंतुकों, प्रकाशकों, सह-आयोजक संस्थाओं और मीडियाकर्मियों का आभार भी व्यक्त किया। मलिक के अनुसार मेले के आगामी संस्करण में पुस्तकों, विचारों और सांस्कृतिक संवाद का और भी समृद्ध कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा एवं प्रवेश पुनः सभी के लिए निःशुल्क रहेगा।

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