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अब 2027 में होगा हिमालयी महाकुंभ नंदा राजजात का आयोजन, 20 पड़ावों से होकर गुजरती है 280 किमी की यह यात्रा

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सांकेतिक तस्वीर।



संवाद सहयोगी, जागरण, कर्णप्रयाग (चमोली)। हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राजजात-2026 का आयोजन अब वर्ष 2027 में होगा। इस वर्ष ज्येष्ठ (मई-जून के मध्य) में मलमास (अधिमास) के चलते राजजात के आयोजन की तिथियां काफी आगे चली गई हैं, इसलिए यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

रविवार को कर्णप्रयाग हुई नंदा देवी राजजात समिति की बैठक में कहा गया कि सितंबर में उच्च हिमालयी क्षेत्र में आयोजन जोखिमभरा हो सकता है, लिहाजा 2026 में राजजात का आयोजन संभव नहीं हो पाएगा।

समिति के अध्यक्ष डा. राकेश कुंवर की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिलाधिकारी चमोली के पत्र और नंदा देवी राजजात मार्ग अध्ययन दल की रिपोर्ट पर चर्चा हुई।

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कहा गया कि मलमास के कारण 2026 में नंदा नवमी तिथि 20 सितंबर को पड़ रही है। इससे राजजात अगस्त के बजाय सितंबर में शुरू हो पाएगी, जबकि इस दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्र में चुनौतियां बढ़ जाती हैं।

ऐसे में राजजात का आयोजन 2027 में कराना सर्वथा उपयुक्त होगा। इस मौके पर समिति के महासचिव भुवन नौटियाल, सुशील रावत, जय विक्रम सिह कुंवर, भुवन हटवाल, बिजेंद्र सिंह, महानंद मैठाणी, डीडी कुनियाल, पृथ्वी सिह रावत आदि मौजूद रहे।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में डा. राकेश कुंवर ने कहा कि वर्ष 2027 में वसंत पंचमी के मौके पर गढ़वाल राजवंशी कांसुवा गांव के राजकुंवर नंदा देवी मंदिर नौटी में राजजात को लेकर मनौती मांगेंगे और पंचांग गणना के अनुसार आगे के कार्यक्रमों की घोषणा करेंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी 2026 में राजजात के मुहूर्त की अनुष्ठानिक घोषणा नहीं हुई है थी और यात्रा सिर्फ प्रस्तावित थी।
ये प्रस्ताव हुए पारित

[*]राजजात को व्यवस्थित, भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए गठित हो राजजात प्राधिकरण।
[*]छंतोलियों, डोली पडावों, यात्रा समिति प्रतिनिधियों, कार्यदायी संस्थाओं व जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी व जिलास्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हो यात्रा समितियों का गठन।
[*]राजजात के लिए बजट में स्वीकृत हो 5,000 करोड़ का आर्थिक पैकेज, राजजात मद का हो सृजन, ताकि हर वर्ष बजट में लोकजात के लिए मिल सके उचित राशि।
[*]घोषित हो राजजात का मानचित्र, बधाण की मां नंदा के सभी पड़ाव।
[*]देवराड़ा व कुरुड़ को पर्यटन मानचित्र में मिले जगह।

20 पड़ावों से होकर गुजरती है 280 किमी की यह यात्रा

चमोली जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में 12 साल बाद आयोजित होने वाली एशिया की सबसे लंबी 280 किमी की धार्मिक पैदल यात्रा 20 पड़ावों से होकर गुजरती है। इनमें पांच पड़ाव निर्जन एवं दुर्गम हैं।

20 दिन की यह यात्रा नौटी स्थित नंदा देवी मंदिर से शुरू होती है और समुद्रतल से 14,600 फीट की ऊंचाई से होते हुए होमकुंड पहुंचकर पूर्णता को प्राप्त करती है। इसके लौटने का मार्ग चंदनियाघट से सुतोल व घाट होते हुए है। इससे पहले राजजात का आयोजन वर्ष 2014 में हुआ था।

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