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Aditya Sahu Interview: बूथ पर काटी है पर्ची, मड़ुआ की रोटी खाकर किया है काम; अतीत को याद कर भावुक हुए भाजपा अध्यक्ष

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झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू। (जागरण)



राज्य ब्यूरो, रांची। यह विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भाजपा में ही संभव है। 16 साल की उम्र में भाजपा से जुड़ने वाले भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की राजनीति किसी पद, प्रतिष्ठा या महत्वाकांक्षा की देन नहीं रही, बल्कि यह सेवा, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा की यात्रा रही है।

संघर्ष के उन दिनों में मडुआ की रोटी खाकर पार्टी का काम करना, गांव-गली में संगठन को खड़ा करना और बिना किसी अपेक्षा के जिम्मेदारियां निभाना ही उनकी पहचान बनी। आज भाजपा ने जब उन्हें झारखंड प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है तो वे अपने अतीत को याद करते हुए कई बार भावुक हो उठते हैं।

वे पार्टी को मां की तरह मानते हैं, जो बिना शर्त सब कुछ देती है और बदले में सिर्फ समर्पण चाहती है। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है, सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना, उन्हें सम्मान देना और संगठन को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाना।

दैनिक जागरण के राज्य ब्यूरो प्रमुख प्रदीप सिंह ने झारखंड भाजपा के अध्यक्ष आदित्य साहू से विस्तार से तमाम विषयों पर बातचीत की।

प्रश्न- पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने की घोषणा के बाद सबसे पहला ख्याल क्या आया?

जवाब- सच कहूं तो सबसे पहले अपने पुराने दिन याद आ गए। मैं बूथ पर बैठकर रसीद काटता था, झंडा उठाता था, पोस्टर लगाता था। उस समय कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि पार्टी एक दिन मुझे इतना बड़ा दायित्व देगी। आंखों के सामने पूरी यात्रा घूम गई। संघर्ष, भूख, थकान और कार्यकर्ताओं का प्यार। उसी भावुकता ने आंखें भिगो दीं।

प्रश्न- आपने 16 साल की उम्र में भाजपा का दामन थामा। उस वक्त क्या सोच थी?

जवाब- उस उम्र में न राजनीति की समझ थी, न पद और प्रतिष्ठा की लालसा। बस इतना था कि पार्टी की विचारधारा दिल को छू गई। मुझे लगा कि यह संगठन देश और समाज के लिए काम करता है। कभी नहीं सोचा था कि पार्टी मुझे इतना कुछ देगी। मैं आज भी खुद को वही 16 साल का कार्यकर्ता मानता हूं, जिसने सेवा भाव से काम शुरू किया था।

प्रश्न- आपने कई बार कहा कि भाजपा आपके लिए मां की तरह है। इसका क्या अर्थ है?

जवाब- मां बिना शर्त प्रेम करती है, बिना कुछ मांगे सब कुछ देती है। भाजपा ने भी मेरे साथ वही किया। मैंने कभी पद की चाहत लेकर काम नहीं किया। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दी, उसे पूरी निष्ठा से निभाया। मुश्किल वक्त में पार्टी ने मुझे संभाला, रास्ता दिखाया। इसलिए मैं कहता हूं कि भाजपा मेरे लिए मां की तरह है।

प्रश्न- संघर्ष के दिनों की कोई ऐसी याद, जो आज भी दिल को छू जाती हो?

जवाब- ऐसी यादें बहुत हैं। कई बार खाने को कुछ खास नहीं होता था। मडुआ की रोटी खाकर पार्टी का काम किया है। दिनभर संगठन का काम, रात को थकान, लेकिन मन में संतोष रहता था कि पार्टी के लिए कुछ कर रहा हूं। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो वही दिन मेरी सबसे बड़ी पूंजी लगते हैं।

प्रश्न- प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सबसे बड़ी चुनौती क्या मानते हैं?

जवाब- सबको साथ लेकर चलना बड़ा काम है। भाजपा एक विशाल संगठन है, जिसमें हर कार्यकर्ता की अपनी अपेक्षा और भावनाएं हैं। मेरी कोशिश रहेगी कि कोई भी कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित न महसूस करे। संगठन तभी मजबूत होता है, जब अंतिम पंक्ति का कार्यकर्ता भी खुद को महत्वपूर्ण समझे। सभी कार्यकर्ताओं को मान-सम्मान के साथ पार्टी के काम में लगाऊंगा। भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी है और कार्यकर्ता ही इसकी असली ताकत हैं।

प्रश्न- विपक्ष अक्सर भाजपा को नेतृत्व केंद्रित पार्टी बताता है। आप इसे कैसे देखते हैं?

जवाब- भाजपा विचारधारा और संगठन पर चलने वाली पार्टी है। यहां व्यक्ति नहीं, विचार बड़ा होता है। नेतृत्व जरूर है, लेकिन नेतृत्व भी संगठन की देन है। मेरी पूरी यात्रा इसका उदाहरण है, एक सामान्य कार्यकर्ता को संगठन ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया।

प्रश्न- आने वाले समय में संगठन को किस दिशा में ले जाने की योजना है? झारखंड में पार्टी सत्ता से दूर है।

जवाब- हम बूथ स्तर को और मजबूत करेंगे। कार्यकर्ताओं को ज्यादा जिम्मेदारी दी जाएगी। संगठनात्मक प्रशिक्षण, संवाद और अनुशासन, इन तीनों पर विशेष फोकस रहेगा। चुनाव जीतना लक्ष्य है, लेकिन उससे पहले संगठन को सशक्त करना आवश्यक है। राज्य सरकार हर मोर्चे पर विफल है। सरकार के खिलाफ लोगों में आक्रोश है।हम रणनीति बनाकर सरकार की नाकामियों को लोगों के बीच ले जाएंगे। राज्य सरकार तुष्टीकरण के तहत काम कर रही है। सरकार के विरुद्ध सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन होगा। पार्टी की अपेक्षाओं पर खरा उतरना मेरी प्राथमिकता है।

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