जम्मू-कश्मीर में क्रिप्टो से हो रहा आतंक और अलगाववाद का वित्तपोषण, हवाला नेटवर्क की तरह इस्तेमाल हो रहा चैनल
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/18/article/image/JK-1768759578981.webpअलगाववादी तत्वों को पुनर्जीवित करने के लिए हो रहा है उपयोग (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुरक्षा एजेंसियों ने क्रिप्टो हवाला नेटवर्क का पता लगाया है। इस नेटवर्क के माध्यम से मूल स्त्रोत को गुप्त रखते हुए विदेशों से जम्मू-कश्मीर तक पैसा पहुंचाया जा रहा था। इसका इस्तेमाल आतंक व अलगाववादी गतिविधियों के वित्त पोषण में किया जा रहा था।
अधिकारियों ने रविवार को यहां बताया कि यह चैनल पूरी तरह हवाला नेटवर्क की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इससे पैसे के मूल स्त्रोत तक पहुंचना आसान नहीं रहता और आतंकी नेटवर्क तक विदेशी पैसा पहुंचा रहा है।
इसने हमारी सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। यहां बता दें कि सुरक्षाबल ने आतंकियों के नेटवर्क पर शिकंजा कस रखा है और उनके वित्त स्त्रोत भी लगभग बंद हैं। क्योंकि इसमें गैर बैंकिंग चैनल का उपयोग किया जाता है, ऐसे में धन के स्त्रोत तक पहुंचना सुगम नहीं है।सभी वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स वित्तीय खुफिया इकाई से पंजीकृत रहते हैं और प्रत्येक लेन-देन पर नजर रहती है।
वित्त वर्ष 2024-25 में केवल क्रिप्टो 49 एक्सचेंज ने पंजीकरण कराया था। उसके बाद सरकार ने नियमों में बदलाव किया और इनके उपयोगकर्ताओं की भौगोलिक ट्रै¨कग के साथ अन्य उपाय भी अनिवार्य बनाए गए हैं। इसमें उपयोगकर्ताओं से \“\“लाइव सेल्फी\“\“ अनिवार्य रहती है।
केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर की जांच
साथ ही पेनी ड्राप विधि से खाते की पुष्टि के साथ पैन व अन्य पहचान पत्र के माध्यम से पुष्टि अनिवार्य बनाई गई है। केंद्रीय एजेंसियों संग मिलकर जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच में सामने आया है चीन, मलेशिया, म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों से एकसे क्रिप्टो वालेट चलाए जा रहे हैं और उसके वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग किया जा रहा है ताकि पहचान को छिपाया जा सके।
लगातार क्रिप्टो वालेट के पंजीकरण बढ़ने की जानकारी मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस पहले से ही घाटी में वीपीएन के उपयोग को निलंबित कर चुकी है। हाल में कुछ लोगों पर कार्रवाई भी हुई है।
अधिकारियों के अनुसार विदेशी हैंडलर सीधे इन निजी वालेट में क्रिप्टोकरेंसी भेजते हैं और इसमें बिना किसी विनियमित वित्तीय चैनल के इस्तेमाल किए यह वालेट धारक दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाकर हवाला व्यापारियों से मिलते हैं और नकद में क्रिप्टो बेचते हैं।चूंकि यह पूरा नेटवर्क अनौपचारिक चैनल पर चलता है, ऐसे में किसी की भी तरह से धन के स्त्रेात तक नहीं पहुंचा जा
सकता। इसके बाद यह पैसा फर्जी अर्थात (म्यूल) बैंक खातों में रखा जाता है। इसमें खाता धारक प्रति लेन-देन 0.8 से 1.8 प्रतिशत लेते हैं और शेष राशि आतंक के नेटवर्क तक पहुंच जाती है। उनके खातों का पूरा नियंत्रण धोखाधड़ी करने वालों के पास रहता है।
क्रिप्टो हवाला का उपयोग बना चुनौती
अधिकारियों ने कहा कि क्रिप्टो हवाला का उपयोग एक नई चुनौती प्रस्तुत कर रहा है और \“\“ग्रे मार्केट\“\“ में कार्य करते हुए यह व्यापारी मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानूनों से बच निकलते हैं। इनके वित्त की ट्रेल नहीं मिलती है। इस तरह यह पैसा हमारी अर्थव्यवस्था में घुस रहा है।
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