गुप्त नवरात्रि 2026 : यह शक्ति का उत्सव नहीं, शक्ति के सामने समर्पण का उत्सव है, इस बातों का रखें ख्याल
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/19/article/image/Gupt-Navratri-2026-1768762566576.webpगुप्त नवरात्रि के बार में बता रहे आचार्य संपूर्णानंद
डिजिटल डेस्क, भागलपुर। Gupt Navratri 2026: सनातन परंपरा में जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि जन-सामान्य के लिए प्रसिद्ध हैं, वहीं वर्ष में दो बार आने वाली गुप्त नवरात्रि गुप्त साधना के लिए प्रसिद्ध है। यह साधना दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अंतर्मन की शुद्धि, शक्ति-जागरण और आत्मोन्नति के लिए की जाती है।
गुप्त नवरात्रि कब आती है?
वेद विद्यापीठ गुरुधाम बौंसी के आचार्य सम्पूर्णानन्द ने कहा कि गुप्त नवरात्रि वर्ष में दो बार आती है। माघ मास की गुप्त नवरात्रि और आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि। ये दोनों नवरात्रियां शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक होती हैं। वर्ष 2026 में यह 19 जनवरी को प्रतिपदा है और 27 जनवरी को नवमी 28 को दशमी है। 19 से 28 जनवरी तक का गुप्त नवरात्रि है।
साधनाएं गुप्त रखी जाती है
आचार्य सम्पूर्णानन्द ने बताया इस नवरात्रि में की जाने वाली साधनाएं गुप्त रखी जाती है। साधक अपने व्रत, जप, मंत्र, तपस्या का प्रचार नहीं करता है। बल्कि आंतरिक साधना को महत्व दिया जाता है। गुप्त नवरात्रि में मुख्यतः 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। यह नवरात्रि श्रद्धा व समर्पण के भाव से करने से साधकों की मनोकामना पूर्ण होती है।
गुप्त नवरात्रि में साधना कैसे करें?
आचार्य सम्पूर्णानन्द ने कहा- प्रतिदिन प्रातः मां दुर्गा का स्मरण कर मन में कहें कि मैं यह साधना माता की कृपा, आत्मशुद्धि व सद्बुद्धि के लिए कर रहा हूं। स्वच्छ स्थान चुनें लाल या पीला आसन ले लें। दीपक पूर्व दिशा में रखें और मंत्र जप और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। श्रद्धा से, नियमितता से, संयम से और विनम्रता से माता तब प्रसन्न होती हैं।
यह समर्पण का पर्व है
आचार्य सम्पूर्णानन्द के अनुसार, गुप्त नवरात्रि शक्ति का उत्सव नहीं है बल्कि शक्ति के सामने समर्पण का पर्व है। जो साधक शांत मन, शुद्ध भावना और गुप्त साधना से माता को पुकारता है उस पर माता स्वयं मार्गदर्शक बन जाती हैं।
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