यूपी में पतियों के बन गए वोट, नाम ढूंढती रह गईं पत्नियां; मतदाता सूची से किन लोगों के कटे नाम?
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/18/article/image/SIR-baghpat-1768760182322.webpजहीर हसन, बागपत। जिले के एसआइआर के विशेष अभियान के तहत 1081 बूथों पर बीएलओ ने मतदाता सूचियों को पढ़कर सुनाया तथा दिखाया।
उन सैकड़ों महिलाओं को करारा झटका लगा, जिनके पतियों के वोट बन गए, लेकिन वे मतदाता सूचियों में अपना नाम ढूंढती रह गईं। वहीं जिन्हें मतदाता सूचियों में अपना नाम मिला, उनके चेहरे खिल उठे और जो रह गए, वे अपने वोट बनवाने के लिए मांगे गए दस्तावेजों को लेकर कंफ्यूज होकर लौटे।
कई बूथों पर देखने को मिला कि महिलाओं के वोट नहीं बने, लेकिन उनके पतियों के वोट बन गए हैं। सिसाना गांव में मैपिंग नहीं होने से एक बूथ पर 60 वोट कट गए, जिनमें सभी महिलाएं हैं।
इसी गांव में दूसरे बूथ पर 198 तथा तीसरे बूथ पर 80 वोट कट गए, जिनमें सभी महिला हैं। चौथे बूथ पर 168 वोट ड्राफ्ट सूची में नहीं आए, जिनमें 80 प्रतिशत महिलाएं हैं। गौरीपुर जवाहरनगर गांव में एक बूथ पर 298 वोट कट गए, जिनमें आधे से ज्यादा महिलाए हैं।
निवाड़ा में एक बूथ पर 122 वोट कट गए, जिनमें 70 प्रतिशत से ज्यादा महिलाए हैं। नैथला गांव में जिनकी मैपिंग नहीं हुई, उनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। किसी के पास पैन कार्ड नहीं तो किसी के पास जन्म तिथि साबित करने वाला दस्तावेज नहीं तो कुछ मायके से वर्ष 2003 की मतदाता सूची मंगाकर अपना या पूर्वज का नाम होने का सबूत नहीं दे पाईं।
कई बीएलओ ने बताया कि किसी महिला का मायके में 2003 में वोट बना था तो उसमें पति की जगह पिता का नाम दर्ज है। इसी तरह आधार कार्ड में पति की जगह पिता का नाम तथा पता भी बदला है। इन्हीं वजह से महिलाओं को वोट बनवाने में दिक्कत आ रही है।
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चौधराइन... घर की बात बाहर नहीं कहते
सरूरपुरकलां गांव में एक बूथ पर वोटर लिस्ट देखकर लौट रहीं एक महिला को पति से कहते सुना कि मैं पहले आपसे कही थी कि मायके से वोटर लिस्ट ले आओ, जिसमें मेरे मम्मी-पापा का नाम है, पर आप सुनने को ही तैयार नहीं थे। अब मेरी वोट कट गई तो आपको तो चैन मिल रही होगी।
पति ने हंसकर बोला कि नाराज मत हो चौधराइन...घर की बात यूं ही बाहर नहीं कहते। कोई सुनकर हमारी मजाक बना लेगा। चिंता मत करो...तुम्हारी वोट बनगी, क्योंकि अभी समय है वोट बनवाने का।
29 साल बाद पूरी होगी चाहत
-51 वर्षीय सुरेश देवी पत्नी रमेश जिला मुजफ्फरनगर के दधेडू गांव की मूल निवासी हैं। 29 साल पहले गौरीपुर मोड़ के पास पेट्रोल पंप वाली गली के पास उनका मकान था, इसलिए उनका वोट निवाड़ा गांव की वोटर लिस्ट में दर्ज था, लेकिन कुछ साल पहले उन्होंने अपना मकान बेचकर गौरीपुर गांव की एक बस्ती में लिया। बोलीं कि अब गौरीपुर जवाहरनगर में वोट बनवाने आईं हूं।
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि नदारद
विभिन्न गांवों के बूथों का भ्रमण करने पर कहीं भी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि नहीं मिले। विपक्ष एसआइआर को लेकर हल्ला मचाता रहता है, लेकिन लोगों की मदद कर वोट बनवाने के लिए अपने प्रतिनिधियों को बूथों पर भेजने में नाकाम है।
नैथला, ग्राम गौरीपुर, सिसाना और बागपत के कई बूथों पर राजनीतिक दलों को कोई प्रतिनिधि नहीं मिला। निवाड़ा में केवल सपा के सगीर अहमद अवश्य लोगों के वोट बनवाने में मदद करते दिखाई दिए।
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