कब्जामुक्त भूमि पर गोवंश के लिए बड़े पैमाने पर चारा उत्पादन, दो वर्ष में 35 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/19/article/image/22_02_2019-22sbl2-c-2_18979451_234312-1768790462162.webpराज्य ब्यूरो, लखनऊ। गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित निराश्रित गोवंश को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में गोचर और चारागाह भूमि पर बड़े पैमाने पर हरा चारा उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश में कुल 61,118.815 हेक्टेयर गोचर एवं चारागाह भूमि उपलब्ध है।
इसमें से 7,140.37 हेक्टेयर भूमि को कब्जा मुक्त कर हरा चारा उत्पादन शुरू किया गया है। यह पहल गोवंश के पोषण स्तर को बेहतर बना रही है और पशुपालकों के लिए भी लाभकारी साबित हो रही है। अगले दो वर्षों में 35,000 हेक्टेयर कब्जामुक्त और सिंचित चारागाह भूमि पर हरा चारा उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।
पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, अब तक 1,691.78 हेक्टेयर में हाइब्रिड नेपियर चारा और 5,448.59 हेक्टेयर में जई, बरसीम जैसे अन्य हरे चारे की बुआई की जा चुकी है। टैग्ड गोचर भूमि पर शत-प्रतिशत हरा चारा उत्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है।
हरदोई, सुल्तानपुर, कानपुर नगर और रामपुर हरा चारा उत्पादन में शीर्ष जिलों में शामिल हैं। चारागाह भूमि का समतलीकरण, सुरक्षाबाड़ा और खाई निर्माण जैसे कार्य मनरेगा कन्वर्जेन्स से कराए जा रहे हैं, जिससे रोजगार भी मिल रहा है।
शीतलहर को देखते हुए गो-आश्रय स्थलों में बोरा-चट्ट, तिरपाल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के निर्देश भी दिए गए हैं। कुल मिलाकर, यह पहल गोवंश संरक्षण के साथ पशुपालन को सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
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