LHC0088 Publish time 2026-1-19 07:56:21

बिहार की सियासत में ‘वापसी’ पर फुल स्टॉप: ललन सिंह बोले– जदयू में न दरवाजा खुला है, न खुलेगा

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ललन सिंह ने प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी की अटकलों को खारिज किया



डिजिटल डेस्क, पटना। पटना की राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि कभी जनता दल यूनाइटेड से जुड़े रहे प्रशांत किशोर (पीके) और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी हो सकती है। इन अटकलों के बीच जदयू के वरिष्ठ नेता और सांसद ललन सिंह का बयान सामने आते ही सियासी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। उन्होंने न सिर्फ इन चर्चाओं को खारिज किया, बल्कि दोनों नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए साफ संकेत दे दिया कि जदयू में उनकी वापसी की कोई गुंजाइश नहीं है।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में ललन सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश की, पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया और भीतर से संगठन को तोड़ने का काम किया, उनके लिए जदयू में न तो सहानुभूति है और न ही भविष्य। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार की राजनीति में नए सिरे से समीकरण बनने की चर्चाएं जोरों पर हैं।

प्रशांत किशोर को लेकर ललन सिंह ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि वह उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते तक नहीं। उन्होंने याद दिलाया कि पीके ने कभी दावा किया था कि जदयू को 25 सीटें भी नहीं मिलेंगी और यहां तक कि राजनीति छोड़ने की बात भी कही थी।

लेकिन नतीजा सबके सामने है, नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने 85 सीटों पर जीत दर्ज की। ललन सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने राजनीति छोड़ने की घोषणा की थी, उन्हें पहले अपने वादों पर अमल करना चाहिए।

आरसीपी सिंह के मामले में ललन सिंह का रुख और भी सख्त नजर आया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर रहकर कुछ लोगों ने सुनियोजित तरीके से भितरघात किया, जिससे जदयू को भारी नुकसान उठाना पड़ा और सीटें 72 से घटकर 42 तक आ गईं।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेतृत्व ने इस नुकसान की भरपाई कर ली है और जनता ने दोबारा नीतीश कुमार पर भरोसा जताया है।

विपक्षी खेमे, खासकर तेजस्वी यादव की राजनीतिक गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए ललन सिंह ने संयमित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि हर पार्टी को अपनी रणनीति बनाने और बैठकें करने का अधिकार है, लेकिन इससे जदयू की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उनके मुताबिक, नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार का विकास एजेंडा लगातार आगे बढ़ रहा है और जनता का विश्वास आज भी मजबूती से उनके साथ है।

कुल मिलाकर, ललन सिंह के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जदयू फिलहाल किसी “पुराने अध्याय” को दोबारा खोलने के मूड में नहीं है और पार्टी अपनी राजनीति को सिर्फ संगठन, विकास और नीतीश कुमार के नेतृत्व के इर्द-गिर्द ही आगे बढ़ाना चाहती है।
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