बीईपी में संविदा बहाली पर सवाल, आउटसोर्सिंग नियुक्तियों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/19/article/image/nitish-kumar-1768797405161.webpआउटसोर्सिंग नियुक्तियों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपी) में संविदा कर्मियों की नियुक्ति को लेकर उठ रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अब औपचारिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जा रही नियुक्तियों में कथित रूप से पैसे की उगाही और नियमों की अनदेखी की शिकायतों के बाद बीईपी ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति पूरे मामले की पड़ताल कर एक सप्ताह के भीतर अपनी स्पष्ट रिपोर्ट सौंपेगी।
बीईपी की ओर से गठित जांच समिति में प्रशासी पदाधिकारी शाहजहां, असैनिक कार्य प्रबंधक (प्रभारी) भोला प्रसाद सिंह और लेखा पदाधिकारी मो. रहमतुल्लाह को शामिल किया गया है।
समिति को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह संबंधित परिवाद पत्र में लगाए गए सभी आरोपों की बिंदुवार जांच करे और यह स्पष्ट करे कि आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया या नहीं।
बिहार राज्य परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार ने जांच समिति को निर्देश दिया है कि वे तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी कर्मियों और एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से इंकार नहीं किया जाएगा।
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 29 दिसंबर 2025 को हुई थी, जब बीईपी से जुड़े कुछ संविदा और अन्य कर्मियों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव और बीईपी के राज्य परियोजना निदेशक को एक संयुक्त पत्र भेजा था।
पत्र में आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जा रही संविदा नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धांधली का आरोप लगाया गया था।
शिकायत पत्र में दावा किया गया था कि संविदा पर बहाली के नाम पर अभ्यर्थियों से अवैध रूप से पैसे वसूले जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि इस पूरी प्रक्रिया में आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़े कुछ लोग सक्रिय रूप से शामिल हैं और नियुक्तियों में पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव है।
शिकायतकर्ताओं का कहना था कि योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर पैसे देने वालों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे न सिर्फ संस्थान की साख पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि शिक्षा परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
बीईपी में संविदा कर्मियों की भूमिका शैक्षणिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर अहम मानी जाती है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता को गंभीर विषय माना जा रहा है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो न केवल संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई होगी, बल्कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों की भूमिका की भी गहन समीक्षा की जाएगी।
फिलहाल, बीईपी की यह पहल यह संकेत देती है कि परिषद आरोपों को हल्के में नहीं ले रही है। अब सबकी नजरें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि संविदा बहाली में सामने आए आरोपों की सच्चाई क्या है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
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