deltin55 Publish time 2026-1-19 10:52:51

Bengaluru Techie Case: तलाक VS अलगाव, कैसे कानूनन अलग हैं ये दोनों? कब पड़ती है फैमिली कोर्ट की जरूरत


पूरा देश एक ऐसे मामले को लेकर सकते में है जहां बेंगलुरु में काम करने वाले एक व्यक्ति अतुल सुभाष ने अपनी पत्नी के अत्याचार से प्रताड़ित होकर आत्महत्या कर ली। यह सच है कि भारत के कई कानूनों का गलत तरह से इस्तेमाल किया जाता है। जिस तरह से उनकी मौत हुई और जिस तरह से कानूनी दांव-पेंच सामने आए, यह कहना गलत नहीं होगा कि तलाक और अलगाव को लेकर भारत में बहुत से लोगों को सही जानकारी नहीं होती है। दोनों पक्ष के लोगों को इसके कारण परेशानी हो सकती है। इस मामले में तलाक की प्रक्रिया चल रही थी और एलिमनी को लेकर बहस भी जारी थी।

भारतीय समाज में शादी खत्म करने का फैसला लेना आसान नहीं है। इसमें ना सिर्फ व्यवहारिक बल्कि सामाजिक मुद्दे भी सामने आते हैं। शादी खत्म करने का फैसला दो लोगों का नहीं हो सकता है। इसमें परिवारों का तालमेल भी शामिल हो जाता है। इसमें सिर्फ मानसिक तनाव ही नहीं, फाइनेंशियल तनाव भी आ जाता है। अगर कोई जोड़ा तलाक लेने के बारे में सोच रहा है, तो उसे इसके प्रोसेस को भी समझना होगा। आपने कई बार सुना होगा कि लोग तलाक नहीं लेते, लेकिन अलग हो जाते हैं। जिसे जुडीशियल सेपरेशन (Judicial Separation) भी कहा जाता है। पर ये होता क्या है? और तलाक से यह कैसे अलग है?

इसे जानने के लिए हमने बात की मैट्रिमोनियल लॉयरशैली मजूमदार से (Adv. Shaili Mazoomdar, Matrimonial Lawyer), उन्होंने हमें विस्तार से सेपरेशन और तलाक के बीच का अंतर समझाया। चलिए इसे लेकर कुछ बातें कर लेते हैं।

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अगर किसी शादीशुदा जोड़े की आपस में बन नहीं रही है, तो वह दो कानूनी रास्ते चुन सकता है। एक जुडीशियल सेपरेशन और दूसरा तलाक। अब इनमें सबसे बेसिक अंतर यह है कि तलाक में शादी पूरी तरह से खत्म हो जाती है और सेपरेशन को टेम्परेरी माना जाता है। अगर लोग चाहें, तो इसके बाद भी शादी को जारी रख सकते हैं।

तलाक में शादी को पूरी तरह से स्थगित कर दिया जाता है। इसमें शादी से जुड़ी सारी ड्यूटीज खत्म हो जाती हैं। पारिवारिक या सामाजिक रिश्ते खत्म कर दिए जाते हैं। पति-पत्नी में मनमुटाव हो तो प्रॉपर्टी आदि की बातें भी की जाती हैं। इसमें साथ रहने की जिम्मेदारी, प्रॉपर्टी के विवाद से जुड़ी बातें, बच्चों की कस्टडी आदि का फैसला एक बार में ही हो जाता है। अगर तलाक फाइनल हो गया और कोर्ट ने फैसला दे दिया, इसका मतलब शादी खत्म।

इसमें सिर्फ एक साथ रहने के अधिकार खत्म होते हैं। इसके अलावा, घरेलू जिम्मेदारियां भी खत्म हो जाती हैं। हालांकि, प्रॉपर्टी राइट्स, बच्चों के राइट्स आदि वैसे ही रहते हैं। इसमें शादी को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जाता है।

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आसान शब्दों में जुडीशियल या लीगल सेपरेशन का मतलब है कि कपल एक साथ रहना नहीं चाहता, लेकिन तलाक लेकर सब कुछ खत्म भी नहीं करना चाहता है। जोड़ा कानूनी तौर पर अलग हो चुका है, लेकिन शादी के बंधन में बंधा हुआ है इसलिए किसी और से कानूनन शादी नहीं कर सकता।

भारत में 9 अहम मुद्दों पर तलाक मिल सकता है और सभी जुडीशियल सेपरेशन के लिए भी लीगल हैं-

   अडल्ट्री उर्फ व्यभिचार यानी किसी एक पार्टनर का किसी और के साथ अफेयर।
   घरेलू हिंसा या दहेज प्रताड़ना की बिनाह पर।
   अगर एक दूसरे के साथ बन नहीं रही और अलगाव की स्थिति आ गई है।
   अगर पति-पत्नी दोनों में से किसी एक को कोई मानसिक बीमारी है।
   अगर पति-पत्नी में से किसी एक की स्प्लिट पर्सनैलिटी है।
   किसी यौन संक्रमण या बीमारी के आधार पर।
   किसी अन्य शारीरिक बीमारी के आधार पर जिसमें पति या पत्नी को भी वो बीमारी लगने की संभावना हो, जैसे कोढ़, हैपिटाइटिस आदि।
   किसी दूसरे धर्म को अपनाने के आधार पर।
   मौत की आशंका पर।
   
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इसका फैसला कोर्ट करता है कि क्या अपील सही है या नहीं। अगर कोर्ट सैटिसफाई होता है, तो कानूनन अलगाव मिल जाता है और दोनों को अलग रहने की इजाजत मिल जाती है। यहां फिर से ये बात दोहराई जानी जरूरी है कि दोनों में से किसी को भी दोबारा शादी करने की इजाजत नहीं होती। उसके लिए तलाक लेना जरूरी होता है। इस दौरान पति या पत्नी का किसी अन्य के साथ रिश्ता हो जाता है और कोई संतान भी हो जाती है, तो भी यह कानूनी नहीं माना जाएगा।

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हालांकि, इस बीच अगर पति या पत्नी में से किसी एक की मौत हो जाती है, तो दूसरे के पास प्रॉपर्टी इन्हेरिटेंस के अधिकार होते हैं। जुडीशियल सेपरेशन को आप टेम्परेरी आधार मान सकते हैं। अगर बाद में कभी जोड़ा साथ रहना चाहे, तो वो ऐसा कर सकता है।

तलाक का मतलब ही यह है कि आप चीजों को परमानेंटली खत्म कर रहे हैं। शादी का कोई लीगल स्टेटस नहीं रहता है। इसके बाद पति या पत्नी नहीं बस दो अलग इंसान होते हैं। ऐसे में किसी और से शादी करने की छूट भी होती है। लीगल स्टेटस डायवोर्सी हो जाता है।

कुल मिलाकर अगर कोई जोड़ा चाहे, तो अपने हिसाब से तलाक या जुडीशियल सेपरेशन का रास्ता चुन सकता है। जुडीशियल सेपरेशन में लोग मैरिज काउंसिलर के पास जाकर शादी को बचाने की कोशिश भी कर सकते हैं।

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Image Credit: Shutterstock/ Freepik








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