Chikheang Publish time 1 hour(s) ago

Urea Black Marketing: खेतों में जरूरत, बाजार में लूट; खाद की कालाबाजारी से किसानों की बढ़ी परेशानी

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/19/article/image/khad-1768817254252.webp

खाद की कालाबाजारी से किसानों की बढ़ी परेशानी



राज्य ब्यूरो,पटना। Farmers Face Crisis बिहार में रबी की खेती के दौरान यूरिया की कालाबाजारी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान 266 रुपये प्रति बोरी की यूरिया चार सौ रुपये में खरीदने को विवश हैं। लाइसेंसी खाद विक्रेता धड़ल्ले से खाद की कालाबाजी कर रहे हैं। बीडीओ से लेकर बीएओ तक की शिकायत पहुंचाने के उपरांत कोई समाधान नहीं निकल रहा। मुंहमांगी कीमत चुका कर यूरिया की खरीद रहे हैं। कुछ स्थानों पर यूरिया की बोरी के साथ नैनो यूरिया का डब्बा भी खाद विक्रेता थमा दे रहे हैं।

मजबूरी में किसान मनमानी कीमत चुकाने को विवश हैं, क्योंकि गेहूं, चना, मसूर एवं सरसों जैसी रबी फसलों के लिए इस समय यूरिया बेहद जरूरी है।

किसानों का आरोप है कि अधिकृत विक्रेता ढुलाई एवं अन्य लागत बढ़ने की आड़ लेकर ऊंचे दाम वसूल रहे हैं। कई जगहों पर यूरिया को डीएपी या अन्य उर्वरकों के साथ \“पैकेज\“ बनाकर बेचने की शिकायत भी सामने आ रही है।

किसान बताते हैं कि यदि वे अतिरिक्त पैसा नहीं देते, तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। प्रखंड मुख्यालयों एवं पैक्स पर सुबह से ही किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। व‍िशेषकर धान का कटोरा कहे जाने वाले रोहतास, कैमूर, जिले में किसानों को विशेष कठिनाई हो रही है। ऐसी परेशानी अन्य जिलों में है।
रबी फसलों पर असर, लागत बढ़ी

किसानों का कहना है कि यूरिया महंगा मिलने से खेती की लागत तेजी से बढ़ रही है। पहले से ही बीज एवं मजदूरी महंगी हो चुकी है। ऐसे में यूरिया की कालाबाजारी रबी फसलों की लागत को और बढ़ा रही है।

इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा। छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिनके पास अतिरिक्त पैसा नहीं होता।
प्रशासनिक दावे और जमीनी हकीकत

कृषि विभाग का दावा है कि राज्य में यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति है और कहीं कोई कमी नहीं है। अधिकारियों के अनुसार केंद्र सरकार से नियमित आपूर्ति हो रही है और जिलों में जरूरत के मुताबिक वितरण किया जा रहा है।

हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आ रही है। कई जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन कार्रवाई सीमित दिखाई देती है।
कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति?

कुछ जगहों पर प्रशासन ने छापेमारी कर जुर्माना लगाने की बात कही है, लेकिन किसानों का आरोप है कि यह कार्रवाई केवल दिखावे की है।

बड़े स्तर पर कालाबाजारी करने वाले विक्रेता अब भी बेखौफ हैं। किसानों की मांग है कि दोषी विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द किए जाएं और सख्त कानूनी कार्रवाई हो।


खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए राज्य स्तर पर उड़नदस्ता टीम गठित की गई है। 150 से अधिक एफआइआर की गई है। त्रिस्तरीय निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। किसान सरकार के लिए सर्वोपरि हैं।

राम कृपाल यादव, कृषि मंत्री
Pages: [1]
View full version: Urea Black Marketing: खेतों में जरूरत, बाजार में लूट; खाद की कालाबाजारी से किसानों की बढ़ी परेशानी

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com