कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया के बचाव में उतरे दिग्विजय, कहा- पुस्तक के लेखक-प्रकाशक पर करें कार्रवाई; भाजपा ने किया पलटवार
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/19/article/image/digvijay-and-baraiya-21541-1768824040325.webpदिग्विजय सिंह व फूलसिंह बरैया (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, भोपाल। लड़कियों/महिलाओं से दुष्कर्म जैसे संवेदनशील विषय पर कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के असभ्य बयान पर मप्र में सियासत गरमा रही है। अब इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह फूलसिंह बरैया के बचाव में उतर आए हैं।
दिग्विजय सिंह ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फूल सिंह बरैया ने जो बात कही, वह उनकी निजी सोच या विचार नहीं हैं। उन्होंने तो बिहार के एक विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष रहे हरि मोहन झा, जो कि ब्राह्मण हैं, उनकी पुस्तक का उल्लेख किया था। यदि कार्रवाई करनी ही है, तो पुस्तक लिखने वाले पर करनी चाहिए। प्रकाशक पर कार्रवाई करिए।
यह कहा था बरैया ने
बरैया ने एक मीडिया साक्षात्कार में एससी, एसटी महिला के साथ दुष्कर्म की अधिक घटनाओं को लेकर कहा था कि उनके (नाम नहीं लिया) धर्म ग्रंथ में लिखा है कि इनसे दुष्कर्म से तीर्थ का फल प्राप्त होगा। उन्होंने इसका संदर्भ रुद्रयामल तंत्र नामक पुस्तक में होने का तर्क दिया था। इसे लेकर भाजपा ने जगह-जगह प्रदर्शन किए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाज में जहर घोलने वाले बरैया के बयान पर राहुल गांधी से उन्हें पार्टी से बाहर करने की मांग की।
उधर, माहौल गरमाता देख कांग्रेस ने बरैया से पल्ला झाड़ा और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्टीकरण मांगा। बरैया ने सफाई दी कि जिस बयान को लेकर मेरे ऊपर लगाया जा रहे हैं वह मेरा नहीं बिहार के विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष रहे हरिमोहन झा का है, मैंने किसी संदर्भ में उसे दोहराया है। बरैया को चौतरफा घिरता देख पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बचाव में आए और पुस्तक लिखने वाले पर कार्रवाई की मांग उठाई।
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कांग्रेस के नैतिक दिवालियापन की खुली स्वीकारोक्ति : आशीष अग्रवाल
दिग्विजय के बरैया का बचाव करने पर भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने एक्स पर पोस्ट किया कि दिग्विजय सिंह द्वारा फूल सिंह बरैया का बचाव करना कांग्रेस के नैतिक दिवालियापन की खुली स्वीकारोक्ति है। यदि बरैया के शब्द उनके निजी विचार नहीं थे, तो ऐसी घृणित और महिला-विरोधी बयान देने की आवश्यकता ही क्या थी? क्या किसी पुस्तक का हवाला देकर महिलाओं की गरिमा पर प्रहार उचित हो जाता है? क्या सार्वजनिक रूप से दिए गए बयान की जिम्मेदारी वक्ता की नहीं होती? और यदि वे शब्द गलत थे, तो कांग्रेस ने उसी समय सार्वजनिक खंडन क्यों नहीं किया?
आशीष ने कहा कि यह कोई “संदर्भ” नहीं, बल्कि कांग्रेस की महिला-विरोधी और दलित-विरोधी मानसिकता का सार्वजनिक प्रदर्शन है। कांग्रेस या तो ऐसे बयानों की जिम्मेदारी ले या देश की मातृशक्ति और अनुसूचित जाति-जनजाति समाज से बिना शर्त माफी मांगकर अपने दूषित विधायक को निष्कासित करे।
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