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बाघों के इलाके में ये क्या हो गया? रातों-रात खेतों में तंबू गाड़ने को मजबूर हुए किसान, पहले नहीं देखा ऐसा मंजर

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खेतों में तंबू लगाकर बैठे क‍िसान



सर्वेश कुमार, जागरण, गजरौला कलां। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) बाघों के लिए संरक्षित है। पीटीआर के जंगल से बाघों के बाहर आने को लेकर आसपास के ग्रामीणों में भय का माहौल होना लाजिमी है, लेकिन पीटीआर से सटे इलाकों में बाघों से ज्यादा हाथियों का आतंक है। नेपाली हाथी जब भी जंगल से बाहर आते हैं तो सबसे पहले वे फसलों को बर्बाद करते हैं और झोपड़ी, मकान आदि भी तोड़ डालते हैं।

गजरौला कलां की माला रेंज से सटे गांवों में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। माला रेंज के अंतर्गत सटे गांव गोयल कालोनी में इन दिनों जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही देखी जा रही है जिससे किसानों में दहशत का माहौल बना हुआ है। इससे बचाव के लिए किसानों ने खेतों में तंबू गाढ़ रखे हैं।

हाथियों के आतंक की वजह से उनकी आंखों से नींद ओझल हो रही है। कुछ दिन पूर्व जंगली हाथियों ने महुआ, सिरसा, सरदाह और ढेरम मंढरिया गांवों में जमकर उत्पात मचाते हुए फसलों को नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद अब गोयल कालोनी के किसान भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं।

गोयल कालोनी निवासी किसान राकेश, ऋषिकेश, सपन मंडल और अमन सहित कई लोग अपने खेतों में तंबू लगाकर रातभर रखवाली करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि वे बारी-बारी से रात दो बजे तक खेतों की निगरानी करते हैं। इसके बाद गांव के अन्य लोग आकर जिम्मेदारी संभालते हैं। ठंड और भय के बीच जागकर फसलों की सुरक्षा करना उनकी मजबूरी बन गई है।

उधर, वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान समय में जंगली हाथियों का झुंड आबादी क्षेत्र की सीमा रेखा से सटे मरौरी इलाके में देखा गया है। विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है लेकिन ग्रामीणों की चिंता कम नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने वन विभाग से स्थायी समाधान और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है ताकि फसलों के साथ-साथ ग्रामीणों की जान माल की भी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

वन विभाग के कर्मचारियों के सामने घना कोहरा संकट बन गया है, क्योंकि कोहरा अधिक होने पर हाथियों की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। ऐसे में नेपाली हाथी कई बार आबादी क्षेत्र में पहुंचकर नुकसान करते हैं। इसके अलावा फसलों को रौंद रहे हैं। इससे किसान बारी-बारी से जागकर फसलों और घरों की सुरक्षा कर रहे हैं।
पीटीआर के चार हाथी नहीं पहुंचाते नुकसान

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में हाथी नहीं हैं। पीटीआर के लिए चार हाथियों को कर्नाटक से लाया गया, जो गस्त और रेस्क्यू के काम आते हैं। इसके अलावा हाथी का एक बच्चा भी है, जिसका पालन पोषण किया जा रहा है। टाइगर रिजर्व के जंगल में आने वाले हाथी नेपाल के हैं, जो शुक्ला फांटा से आ जाते हैं।




शुक्ला फांटा राष्ट्रीय उद्यान से होकर आने वाले नेपाली हाथियों को घने कोहरे की वजह से ट्रैक करने में दिक्कत हो रही है। पास आने पर हाथी के हमला करने का खतरा रहता है। हाथी बार-बार लोकेशन बदल रहे है। कोहरा छंटने के साथ ही हाथियों को यहां से खदेड़ दिया जाएगा।

- मनीष सिंह, डीएफओ पीटीआर





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