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झारखंड निकाय चुनाव: पार्षद किसी भी वार्ड से लड़ सकते हैं, जाति प्रमाण पत्र और खर्च सीमा तय

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झारखंड नगर निकाय चुनाव गाइडलाइन।



बलवंत कुमार, जागरण, धनबाद। Jharkhand Municipal Elections: झारखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नियमों की घोषणा कर दी गई है। वर्ष 2013 के बाद तीन बच्चों वाले लोग चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इसके अतिरिक्त कई अन्य प्रविधान भी निर्धारित किए गए हैं।

पार्षद पद के लिए कोई भी उम्मीदवार दो वार्डों से चुनाव नहीं लड़ सकता है। आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए झारखंड सरकार द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य है। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग ने खर्च की सीमा भी निर्धारित कर दी है।

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि सांसद और विधायक की तरह नगर निकाय चुनाव के प्रत्याशियों को दो वार्डों से नामांकन करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। एक उम्मीदवार केवल एक ही वार्ड से पार्षद पद के लिए नामांकन दाखिल कर सकता है, जबकि वही उम्मीदवार मेयर पद के लिए भी अपना पर्चा भर सकता है। यह रोक केवल वार्ड के संदर्भ में है।

निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, पार्षद पद पर किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ने की छूट प्रत्याशियों को दी गई है। वे अपने वार्ड को छोड़कर नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत के किसी भी वार्ड से पार्षद पद के लिए नामांकन कर सकते हैं। हालांकि, इस छूट के साथ एक शर्त भी है कि प्रत्याशी जिस वार्ड से चुनाव लड़ना चाहता है, उसे नामांकन के समय उसी वार्ड का प्रस्तावक और समर्थक होना अनिवार्य है।

झारखंड का जाति प्रमाण पत्र भी अनिवार्य है। पंचायत चुनाव में यह देखा गया था कि कई प्रत्याशियों ने दूसरे राज्यों के जाति प्रमाण पत्र पर झारखंड में चुनाव लड़ा और जीत भी गए। बाद में उनकी उम्मीदवारी समाप्त कर दी गई।

ऐसी स्थिति से बचने के लिए आयोग ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित वार्डों में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी किसी भी राज्य के हों, लेकिन उनके पास झारखंड राज्य के जिलों से जारी जाति प्रमाण पत्र होना चाहिए। तभी उन्हें आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा।
30 दिनों के भीतर देना होगा खर्च का ब्योरा

मेयर पद के लिए अधिकतम 25 लाख रुपये और पार्षद पद के लिए 5 लाख रुपये खर्च करने की सीमा निर्धारित की गई है। निर्वाचन आयोग ने जनसंख्या के आधार पर नगर निकायों के लिए अलग-अलग खर्च की सीमा तय की है। इसमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के लिए अलग-अलग खर्च की सीमा निर्धारित की गई है।

निर्वाचन आयोग ने यह भी बताया है कि चुनाव समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर प्रत्याशियों को अपने खर्च का ब्यौरा रिटर्निंग अधिकारी को देना होगा। ऐसा न करने पर चुनाव जीतने वाले की उम्मीदवारी रद कर दी जाएगी।
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