Noida: इंजीनियर की मौत मामले में सीएम योगी का बड़ा एक्शन, नोएडा अथॉरिटी के CEO हटाए गए
Greater Noida Car Accident : ग्रेटर नोएडा में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की प्रशासन की नाकामी के चलते नाले में गिरने से मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। वहीं लोगों मे इस हादसे को लेकर गुस्सा है और कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। वहीं अब इस मामले में नोएडा में इंजीनियर की मौत मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा एक्शन लिया है।सरकार ने नोएडा के सीईओ डॉ लोकेश एम को हटाते हुए अब वेटिंग लिस्ट में डाल दिया है।लोकेश एम को नोएडा अथॉरिटी की कमान जुलाई 2023 में मिली थी।सीएम योगी ने लिया एक्शन
बता दें कि ग्रेटर नोएडा में शनिवार देर रात कार सवार इंजीनियर की मौत का खुद ही संज्ञान लेते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने घटना की जांच का भी निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, \“सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर, ADG, मेरठ जोन की अगुवाई में घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया है। डिविजनल कमिश्नर मेरठ और चीफ़ इंजीनियर PWD भी SIT का हिस्सा हैं, जो पांच दिनों में मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।\“
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इंजीनियर की डूबकर हुई थी मौत
सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहने वाले युवराज गुरुग्राम के सेक्टर-54 में डनहम्बी इंडिया में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करते थे। शुक्रवार देर रात वह ऑफिस से घर लौट रहे थे। रास्ते में घना कोहरा होने की वजह से उनकी ग्रैंड विटारा कार नाले की दीवार से टकरा गई और उनके घर के पास बने पानी से भरे बेसमेंट में गिर गई। बेसमेंट में पानी का स्तर काफी ज्यादा था, जिस कारण कार पलट गई और पानी में तैरने लगी। पुलिस के अनुसार, युवराज किसी तरह कार से बाहर निकल आए। उन्होंने तुरंत अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन कर हादसे की जानकारी दी। इसके बाद युवराज के पिता ने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी और खुद भी मौके पर पहुंच गए।
नहीं की पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRFने मदद
बचाव के दौरान युवराज को कई बार अपनी कार के ऊपर खड़े होकर टॉर्च जलाते और मदद के लिए चिल्लाते हुए देखा गया। अंधेरा और घना कोहरा इतना ज्यादा था कि आसपास कुछ भी साफ नजर नहीं आ रहा था। मौके पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF और बाद में NDRF की टीमें मौजूद थीं, फिर भी बचाव कार्य करीब साढ़े चार घंटे तक चलता रहा। अधिकारियों ने शुरुआत में ठंड और बेसमेंट के अंदर मौजूद खंभों से खतरा होने की बात कहकर पानी में उतरने से मना कर दिया।
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