और कितने युवराज की जाएगी जान? ग्रेटर नोएडा में सड़क सुरक्षा की अनदेखी; बिना बाउंड्री वाले कई खतरनाक स्थान
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/19/article/image/Noida-Yuvraj-1768838415435.webpगजेंद्र पांडेय, ग्रेटर नोएडा। और कितने युवराज की जान लेंगे जिम्मेदार...? यह बड़ा सवाल बन गया है। जिले में और भी ऐसे ही मोड़ व अन्य स्थान हैं, जहां पर न तो बैरिकेडिंग लगी हैं और न ही रिफ्लेक्टर और डिवाइडर हैं। ऐसे प्रमुख स्थानों से अभी भी दिन रात आवाजाही करने वाले तमाम युवराज की जान जोखिम में रहती है।
जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि नाॅलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर 150 के जिस टी प्वाइंट पर युवराज हादसे का शिकार हुआ। वहां पर हादसे के तीन दिन बाद भी रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए हैं। फिर भी तमाम मोड़ व स्थानों पर सुरक्षा के उपाय नहीं हैं। आईटी समेत कई कंपनियों के इंजीनियर, अस्पतालों के डाक्टरों समेत हजारों नौकरी पेशा देर रात आवाजाही करते हैं।
नाॅलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र का सेक्टर-150 का टी प्वाइंट पिछले तीन दिन से हर किसी की जुबां पर है। यहां पर बैरिकेडिंग, डिवाइडर या रिफ्लेक्टर नहीं लगे होने से इंजीनियर युवराज मेहता कार समेत सीधे निर्माणाधीन माल के बेसमेंट में भरे 30 फीट गहरे पानी में जा गिरा था। इससे उसकी मौत हो गई थी।
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हादसे को लेकर स्वजन और आसपास की सोसायटियों के लोगों ने घटना स्थल के आसपास बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और डिवाइडर नहीं होने का आरोप लगाया था। उनका यह भी आरोप था कि 15 दिन पहले इसी स्थान पर ट्रक चालक नाले में जा गिरा था। तब भी नोएडा प्राधिकरण के जिम्मेदारों से सुरक्षा के उपाय करने की मांग की गई थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई थी।
फिलहाल जिम्मेदार अभी भी लापरवाह बने हैं। क्यों कि हादसे के अगले दिन यानी शनिवार को घटना स्थल के आसपास बैरिकेडिंग कराई और रविवार देर शाम को डिवाइडर रखवाए गए, जबकि अभी तक वहां पर रिफ्लेक्टर या दुर्घटना प्वाइंट लिखा संकेतक बोर्ड नहीं लगा है।
निर्माणाधीन बेसमेंट की दूसरी दिशा में आधी सड़क टूट कर नीचे गिरी पड़ी है। उस रोड पर भी वाहन चालक आवाजाही करते हैं, लेकिन उस दिशा में बैरिकेडिंग या डिवाइडर नहीं लगाए गए हैं। इससे आवाजाही करने वाले राहगीरों के हादसे का शिकार होने की आशंका बनी है।
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बैरिकेडिंग, डिवाइडर व रिफ्लेक्टर नहीं होने से पहले भी हादसे
पिछले वर्ष मार्च में पी थ्री सोसायटी के पिछले हिस्से में हवेलिया नाले में स्विफ्ट डिजायर कार सवार दिल्ली के मंडावली निवासी स्टेशन मास्टर भारत सिंह जा गिरे थे। उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद जिम्मेदारों ने वहां पर सिर्फ डिवाइडर रखवाए थे, जबकि बैरिकेडिंग व रिफ्लेक्टर अभी तक नहीं लगे हैं।
ठीक इसी तरह यथार्थ अस्पताल से पी थ्री गोल चक्कर की ओर जाने वाले रास्ते पर हवेलिया ओवरब्रिज की रेलिंग जगह-जगह से टूटी है। जबकि इस मार्ग से चौबीसों घंटे हजारों की संख्या में वाहन चालकों की आवाजाही है। यहां पर भी दो साल पहले एक आटो चालक नाले में गिर चुका है। हालांकि तब पानी नहीं भरा होने से उसकी जान बच गई थी, फिर भी ओवर ब्रिज की टूटी रेलिंग ठीक नहीं कराई गई है।
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इन अंधे मोड़ पर न रिफ्लेक्टर न ही डिवाइडर या बैरिकेडिंग
ग्रेटर नोएडा में पीथ्री स्थित हवेलिया नाला पर दो खतरनाक स्थान हैं, जहां पर न रिफ्लेक्टर न ही डिवाइडर या बैरिकेडिंग हैं। ठीक इसी तरह तुस्याना मोड़, खेरली नहर मोड़, 130 मीटर से डाढ़ा स्थित सदर तहसील जाने वाला मोड़ शामिल है। इसके अलावा भी कई जोखिम पूर्ण अंधे मोड़ हैं।
युवराज तक ट्यूब पहुंचा देता तो बच जाती जान: एक्सपर्ट
नाॅलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र में एटीएस ली ग्रैंडियोस के समीप सेक्टर 150 के टी प्वाइंट पर निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ कर्मियों द्वारा किए प्रयासों को लेकर हर कोई सवालिया निशान उठा रहा है।
युवराज की मौत की सूचना पर सोसायटी वाले घटना की रात से लेकर अगले दिन तक घटना स्थल तक आवाजाही करते रहे। यूरेका सोसायटी में ही रहने वाले नौसेना से सेवानिवृत्त केपी सिंह भी घटना स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने निर्माणाधीन बेसमेंट के पानी में दो घंटे फंसे रहे युवराज को बचाने के लिए पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ द्वारा किए प्रयासों को जाना-समझा।
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उनका कहना है कि बचाव दल के कर्मी क्रेन से चढ़ कर युवराज तक रस्सी फेंकने का प्रयास करते रहे। जबकि उन्हें चाहिए था कि कोई कमी लाइफ गार्ड लेकर या ट्रैक्टर अथवा कार के ट्यूब के सहारे भी युवराज तक पहुंचा जा सकता था।
फिलहाल बचाव दल की तरफ से ट्यूब के माध्यम से युवराज मेहता तक पहुंचने का प्रयास नहीं किया गया। जबकि क्रेन आदि अन्य संसाधनों के माध्यम उस तक पहुंच नहीं हो सकी। केपी सिंह ने मोड़ के पास बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर आदि भी नहीं हाेने से हादसा होने का कारण बताया है।
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