तिलक लगाने पर 8 साल के बच्चे को स्कूल से निकाला, लंदन में धार्मिक भेदभाव का शिकार मासूम बच्चा
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/20/article/image/IN-(14)-1768879955295.webpस्कूल के हेड टीचर ने ब्रेक टाइम के दौरान बच्चे पर लगातार नजर रखी थी। इससे बच्चा डर गया। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लंदन की एक प्राइमरी स्कूल में धार्मिक भेदभाव का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महज आठ साल का एक हिंदू बच्चा तिलक लगाने के कारण स्कूल छोड़ने को मजबूर हो गया। इंसाइट यूके नामक संगठन ने इस मामले को उठाया है और इसे धर्म के आधार पर स्पष्ट भेदभाव बताया है।
यह बच्चा लंदन के विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। स्कूल स्टाफ ने बच्चे से तिलक लगाने की वजह बताने और उसकी धार्मिक प्रथा को जस्टिफाई करने को कहा, जिसे इंसाइट यूके ने एक नाबालिग बच्चे के साथ पूरी तरह अनुचित व्यवहार बताया है।
सदमे में है बच्चा
स्कूल के हेड टीचर ने ब्रेक टाइम के दौरान बच्चे पर लगातार नजर रखी थी। इससे बच्चा डर गया। वह खेलना छोड़कर अकेला रहने लगा और दोस्तों से दूर हो गया। यह निगरानी बच्चे के लिए इतनी डरावनी थी कि उसने खुद को अलग-थलग कर लिया।
इसके अलावा, बच्चे को स्कूल में दी गई जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। सिर्फ तिलक लगाने की वजह से उसे लीडरशिप या अन्य पदों से हटाया गया, जो अगर साबित हो गया तो इक्वेलिटी एक्ट 2010 के तहत सीधा धार्मिक भेदभाव माना जाएगा। इस एक्ट में धर्म को संरक्षित विशेषता बताया गया है।
इंसाइट यूके का बयान
इंसाइट यूके के प्रवक्ता ने कहा, “किसी भी बच्चे को अपनी आस्था की वजह से निगरानी में रखा जाना, अलग-थलग महसूस कराया जाना या अधिकार वाली जगह से डराया जाना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।“
उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाएं बच्चे पर लंबे समय तक असर डाल सकती हैं और यह गंभीरसुरक्षा संबंधी सवाल भी खड़े करती हैं। कोई बच्चा अपनी धार्मिक पहचान के कारण स्कूल में असुरक्षित महसूस नहीं कर सकता।
स्कूल से चार बच्चे हुए बाहर
इंसाइट यूके ने बताया कि विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल में धार्मिक भेदभाव के कारण कम से कमचार बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। हिंदू समुदाय के कई परिवारों को इसी वजह से स्कूल बदलना पड़ा।
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