PU सीनेट चुनाव! 28 दिन चला आंदोलन, बवाल और महाप्रदर्शन, अब शेड्यूल जारी होते ही सियासी हलचल तेज
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/20/article/image/PU36-1768891636323.webpपीयू में जिस चुनाव के लिए छात्रों ने लंबा संघर्ष किया उसका अब शेड्यूल जारी हो चुका है।
मोहित पांडेय, चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) सीनेट चुनाव के लिए छात्रों ने कड़ा संघर्ष किया। 28 दिन आंदोलन चला। बवाल और महाप्रदर्शन हुआ। संघर्ष रंग लाया और अब सोमवार को चुनावी शेड्यूल जारी होते ही कैंपस और पंजीकृत स्नातकों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
पंजीकृत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से 15 सदस्यों के लिए होने वाले इस चुनाव को लेकर संभावित उम्मीदवारों ने अपने-अपने समर्थक जुटाने शुरू कर दिए हैं। अब पूरा फोकस मतदाता सूची को मजबूत करने पर है।
सीनेट चुनाव करवाने को लेकर कैंपस में बीते वर्ष भारी विवाद देखने को मिला था। सीनेट और सिंडिकेट में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की थी, जिसने पंजाब की राजनीति में उबाल ला दिया था। विरोध इतना तेज हुआ कि केंद्र को अपने फैसले पर यू-टर्न लेना पड़ा था।
सीनेट चुनाव का शेड्यूल जारी कराने की मांग को लेकर पीयू में करीब 28 दिनों तक लगातार प्रदर्शन हुए और ‘पीयू बचाओ मोर्चा’ का गठन किया गया था। सीनेट के बदलाव को लेकर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल समेत कई राजनीतिक दल एक सुर में केंद्र पर हमला बोलते दिखाई दिए थे।
पंजाब के सीएम मुख्यमंत्री भगवंत मान से लेकर अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल तक ने इसे पंजाब की शैक्षणिक स्वायत्तता पर हमला बताया था। नेताओं का कहना था कि सीनेट केवल यूनिवर्सिटी का नहीं, बल्कि पूरे पंजाब का मुद्दा है। केंद्र इस फैसले के जरिए लोकतांत्रिक ढांचे और राज्य के अधिकारों पर सीधा प्रहार करने की कोशिश कर रही है।
हंगामा, आईजी-एसएसपी के सामने गेट तोड़ अंदर घुसे थे प्रदर्शनकारी
सीनेट चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग को लेकर 10 नवंबर को पंजाब यूनिवर्सिटी में महा प्रदर्शन देखने को मिला था। कड़ी पुलिस सुरक्षा के बावजूद प्रदर्शनकारी यूनिवर्सिटी का मुख्य गेट तोड़कर परिसर में घुस गए थे। किसान, छात्र और मजदूर संगठनों के हजारों कार्यकर्ता यूनिवर्सिटी पहुंचे थे।
कुलपति कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शन में कई राजनीतिक और किसान नेता भी शामिल हुए। हालात बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी थी।
शिक्षा मंत्रालय को बार-बार बदलना पड़ा फैसला, नौ दिनों में चार अधिसूचनाएं
पीयू सीनेट चुनाव को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को नौ दिनों के भीतर चार बार अधिसूचना जारी करनी पड़ी। पहले 28 अक्टूबर की अधिसूचना रद्द की गई, फिर सीनेट-सिंडिकेट सुधारों पर रोक लगाई गई। इसके बाद चार नवंबर को दो नोटिफिकेशन जारी हुए और आखिरकार सात नवंबर को स्पष्ट किया गया कि सीनेट और सिंडिकेट में कोई बदलाव नहीं होगा।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि आदेश जारी होने के बाद छात्रों, शिक्षकों, पूर्व कुलपतियों और मौजूदा कुलपति से महत्वपूर्ण सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुईं। मंत्रालय ने विभिन्न छात्र संगठनों के साथ हुई बैठक में उठाई गई चिंताओं को भी गंभीरता से लिया। उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सीनेट और सिंडिकेट की नई संरचना संबंधी आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है
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