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83 वर्षीय विधवा को 34 साल बाद हाईकोर्ट से मिला न्याय, Punjab सरकार को फैमिली पेंशन जारी करने का आदेश

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कोर्ट ने कहा कि महिला फैमिली पेंशन और अन्य पेंशन लाभों की हकदार थीं, लेकिन यह लाभ उन्हें कभी नहीं मिला।



दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। 83 वर्षीय वृद्ध विधवा को 34 वर्ष के बाद न्याय मिला है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फैमिली पेंशन और सीमित अवधि का बकाया ब्याज सहित देने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि पेंशन को खैरात नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। भुगतान न किया जाना एक निरंतर अन्याय है।

यह फैसला जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने बदका देवी की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता बदका देवी के पति स्वर्गीय राम दास लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में माली के पद पर कार्यरत थे और 20 जुलाई 1991 को सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था। पति की मृत्यु के बाद नियमों के तहत बदका देवी फैमिली पेंशन और अन्य पेंशन लाभों की हकदार थीं, लेकिन यह लाभ उन्हें कभी नहीं मिला।

याचिका में कहा गया कि बदका देवी एक निरक्षर और आर्थिक रूप से कमजोर वृद्ध महिला हैं, जिन्हें सरकारी प्रक्रियाओं की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने समय-समय पर विभाग के समक्ष आवेदन और अभ्यावेदन दिए, सभी आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। इसके बावजूद 30 से अधिक वर्षों तक न तो फैमिली पेंशन स्वीकृत की गई और न ही कोई अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किया गया।

राज्य सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता ने अत्यधिक देरी से अदालत का रुख किया है, क्योंकि पति की मृत्यु वर्ष 1991 में हुई थी और इतने लंबे अंतराल के बाद दायर याचिका देरी और लाचेस से ग्रस्त है। यह भी कहा गया कि फैमिली पेंशन स्वीकृत कराने से पूर्व आवश्यक कंट्रीब्यूटरी पेंशन फंड जमा नहीं कराया गया। हालांकि, राज्य ने यह भी स्वीकार किया कि 23 दिसंबर 2025 को फैमिली पेंशन स्वीकृत करने के संबंध में संबंधित प्राधिकरण को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि पेंशन का दावा एक बार का नहीं होता, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाला अधिकार है।

अदालत ने कहा कि हर महीने पेंशन का न मिलना अपने-आप में एक नया अन्याय है और इस प्रकार पेंशन संबंधी मामलों में देरी का तकनीकी तर्क लागू नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि पेंशन का सीधा संबंध संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 से है, क्योंकि यह वृद्ध व्यक्ति के गरिमापूर्ण जीवन और आजीविका का आधार होती है।
याचिकाकर्ता का दावा पूरी तरह वैध

अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता का फैमिली पेंशन का दावा पूरी तरह वैध है और इसे देरी के आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, संतुलन बनाते हुए हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि बकाया भुगतान को असीमित अवधि के लिए नहीं दिया जा सकता।

परिणामस्वरूप कोर्ट ने निर्देश दिया कि बदका देवी को याचिका दायर करने की तिथि से तीन वर्ष पूर्व तक की फैमिली पेंशन का एरियर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दिया जाए। इसके साथ ही राज्य सरकार और संबंधित विभाग को आदेश दिया गया कि चार सप्ताह के भीतर फैमिली पेंशन तथा अन्य स्वीकार्य पेंशनरी लाभों का नियमित मासिक भुगतान शुरू किया जाए।
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