Dehradun News: नंदा की चौकी पुल के टेंडर निरस्त, आज फिर होगा चयन
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/20/article/image/68048816-1768897013843.webpटेंडर में प्रतिभाग करने वाले तीन ठेका कंपनियों में से दो अयोग्य घोषित, एक टेंडर पर अटका मामला। जागरण
सुमन सेमवाल, देहरादून। आपदा में क्षतिग्रस्त हुए पांवटा साहिब राजमार्ग के नंदा की चौकी पुल की मरम्मत की चुनौती दूर होने का नाम नहीं ले रही। पहले बजट के फेर में टेंडर खोलने की तिथि आगे बढ़ानी पड़ी थी और अब टेंडर खुले तो दो कंपनियों को अयोग्य घोषित कर दिया गया। कुल तीन प्रतिभागियों में से दो के अयोग्य घोषित हो जान के बाद एक टेंडर के कारण इस प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ गया। अब मंगलवार को दोबारा टेंडर खोले जाएंगे।
लोनिवि के अधिकारियों के अनुसार टेंडर में कुल तीन ठेकेदारों/फर्मों ने प्रतिभाग किया था। तकनीकी निविदा में जांच के बाद दो प्रतिभागी अयोग्य पाए गए। जिसके बाद एकमात्र प्रतिभागी के कारण एकल निविदा रह गई थी। ऐसी स्थिति में टेंडर प्रक्रिया जारी रखा जाना नियमों के विपरीत था। लिहाजा, इसे निरस्त कर दिया गया। दोबारा टेंडर आमंत्रित किए जाने के क्रम में अब मंगलवार को टेंडर खोले जाएंगे। जिसके बाद तकनीकी रूप से योग्य प्रतिभागियों का चयन वित्तीय निविदा के लिए किया जाएगा। ताकि टेंडर प्रक्रिया को पूरा किया जा सके।
04 माह से अधर में लटका है पुल का मरम्मत कार्य
15 सितंबर की मध्य रात्रि को हुई अतिवृष्टि में टौंस नदी पर बना नंदा की चौकी के पुल का एक हिस्सा ढह गया था। जिस कारण पांवटा साहिब राजमार्ग पर वाहनों का आवागमन ठप हो गया था।
कुछ दिनों की वैकल्पिक व्यवस्था के बाद नदी के एक भाग पर ह्यूम पाइप डालकर अस्थाई पुलिया बनाई गई। वर्तमान में भी इसी व्यवस्था से राजमार्ग पर वाहनों का आवागमन कराया जा रहा है।
इसी के साथ लोनिवि प्रांतीय खंड ने पुल की क्षतिग्रस्त तब से पांवटा राजमार्ग पर वाहनों का संचालन नदी पर ह्यूम पाइप से अस्थाई पुलिया बनाकर किया जा रहा है। वहीं, लोनिवि ने क्षतिग्रस्त एबटमेंट वाल का नए सिरे से निर्माण के लिए डीपीआर तैयार की थी। करीब 16 करोड़ की डीपीआर पर काम शुरू करने के लिए नवंबर माह में टेंडर भी आमंत्रित किए गए थे।
टेंडर (टेक्निकल बिड) खोलने की तिथि पूर्व में 16 दिसंबर तय की गई थी। सभी इस बात के इंतजार में थे कि वित्तीय निविदा में प्रतिभाग करने के लिए अंतिम रूप से कंपनियों/फर्म का चयन कर लिया जाएगा। लेकिन, एनएचएआइ से बजट को लेकर आवश्यक औपचारिकता पूरी न किए जाने के चलते टेंडर खोलने की तिथि आगे बढ़ा दी गई थी। अधीक्षण अभियंता ओपी सिंह के अनुसार यह हिस्सा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन है।
हालांकि, इसी क्षेत्र में पांवटा साहिब के लिए राजमार्ग चौड़ीकरण और नए ग्रीन फील्ड राजमार्ग के निर्माण के चलते पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को तैयार करने में प्राधिकरण ने असमर्थता जताई। एनएचएआइ ने कहा कि यह काम लोनिवि प्रांतीय खंड करे और धनराशि उन्हें उपलब्ध करा दी जाएगी। पूर्व की टेंडर प्रक्रिया में प्रस्ताव एनएचएआइ मुख्यालय नहीं भेजा जा सका था। जिस कारण टेंडर को आगे बढ़ाया गया था, जबकि अब टेंडर प्रतिभाग करने वाले दो ठेकेदारों को अयोग्य घोषित कर दिए जाने से मामला लटक गया।
वर्ष 1992 में बने पुल की खामी भी की जानी है दूर
यह पुल वर्ष 1992 में बना था और उस समय जो गलती की गई थी, उसे डीपीआर में सुधार लिया गया। लोनिवि के परीक्षण में चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि पानी ने किनारे वाली वाल को ध्वस्त किया, जबकि बीच के पिलर जस के तस खड़े रहे।
पता चला था कि न सिर्फ क्षतिग्रस्त एबटमेंट वाल ओपन फाउंडेशन वाली है, बल्कि देहरादून के छोर वाली वाल की भी यही प्रकृति है। सिर्फ बीच के पिलर वेल फाउंडेशन वाले पाए गए। यही कारण रहा कि नदी के वेग में बने पुल के बीच के पिलर महफूज खड़े रहे, जबकि किनारे की एबटमेंट वाल क्षतिग्रस्त हो गई।
लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिकारियों के अनुसार पुल की मरम्मत के डिजाइन में ओपन फाउंडेशन की जगह वेल फाउंडेशन का प्राविधान किया गया है। इसकी गहराई 20 मीटर से अधिक है, जबकि ओपन फाउंडेशन की गहराई महज 05 मीटर के आसपास होती है। एबटमेंट वाल के निर्माण के साथ ही परियोजना में सुरक्षा के कुछ अन्य प्राविधानभी जोड़े गए हैं। अधिकारियों के अनुसार दो से तीन माह में पुल तैयार कर यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
वेल और ओपन फाउंडेशन में अंतर
वेल फाउंडेशन ह एक गहरे नींव (डीप फाउंडेशन) का प्रकार है, जिसमें एक बड़ा खोखला बेलनाकार ढांचा (वेल या कैसन) जमीन में डुबोया जाता है। वहीं, ओपन फाउंडेशन एक उथला नींव का प्रकार है, जिसे जमीन की सतह के पास बनाया जाता है। इसमें खुदाई कर सीधे ठोस कंक्रीट का आधार डाला जाता है।
नदियों के लिए वेल फाउंडेशन ही उपयुक्त
विशेषज्ञों के अनुसार वेल फाउंडेशन नदियों, झीलों या जलमग्न क्षेत्रों में, जहां पुल के पिलर पानी के अंदर खड़े किए जाते हैं। वहीं, ओपन फाउंडेशन ठोस जमीन, पहाड़ी या शुष्क क्षेत्रों में तैयार की जाती है।
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