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77th Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय गीत सहित प्रसिद्ध कविताएं यहां करें प्राप्त

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Republic Day 2026



एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। हमारा देश 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस सेलिब्रेट करेगा। इस राष्ट्रीय पर्व को लेकर देश के स्कूल, कॉलेजों में तैयारियां हो रही हैं। इस दिन पर स्कूल-कॉलेज के साथ ही विभिन्न सरकारी भवनों, सोसाइटी में विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड, गीत-संगीत, भाषण प्रतियोगिता, कविता मंचन का आयोजन किया जाता है। अगर आप भी इस बार गणतंत्र दिवस पर किसी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत या कविता सुनाना चाहते तो यह पेज आपके लिए उपयोगी है। आप यहां से भारत के राष्ट्रीय गीत सहित अन्य बेहतरीन कविताएं प्राप्त कर सकते हैं।
77वें गणतंत्र दिवस की थीम

गणतंत्र दिवस को हर साल किसी विशेष थीम के साथ सेलिब्रेट किया जाता है। इस वर्ष 77वां गणतंत्र दिवस वंदे मातरम के 150 वर्ष (150 YEARS OF VANDE MATARAM) थीम के साथ सेलिब्रेट किया जा रहा है। आपको बता दें कि वंदे मातरम हमारे देश का राष्ट्रीय गीत है। आप किसी कार्यक्रम या स्कूल प्रोग्राम में इसे सुना सकते हैं जो थीम के साथ अच्छा रहेगा।

राष्ट्रीय गीत- वंदे मातरम

[*]सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम्,
[*]शस्यश्यामलां मातरम्।
[*]वन्दे मातरम्!
[*]शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्
[*]फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
[*]सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
[*]सुखदां वरदां मातरम्।
[*]वन्दे मातरम्!
[*]कोटि कोटि कंठ कलकल निनादकराले
[*]द्विसप्त कोटि भुजैर्धृतखर करवाले,
[*]अबला केनो मा एतो बले,
[*]बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
[*]रिपुदलवारिणीं मातरम्।
[*]वन्दे मातरम्!
[*]तुमि विद्या, तुमि धर्मं
[*]तुमि हृदि, तुमि मर्मं
[*]त्वं हि प्राणाः शरीरे
[*]बाहुते तुमि मा शक्ति,
[*]हृदये तुमि मा भक्ति,
[*]तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे!
[*]वन्दे मातरम्!
[*]त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
[*]कमला कमलदलविहारिणी
[*]वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्
[*]नमामि कमलां अमलां अतुलाम्
[*]सुजलां सुफलां मातरम्।
[*]वन्दे मातरम्!
[*]श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्
[*]धरणीं भरणीं मातरम्।
[*]वन्दे मातरम्!
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(Image-freepik)
एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो

यह कविता देश के प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन जी द्वारा लिखी गई थी -

[*]इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बंधाए,
[*]कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए,
[*]इन्हें पकड़ने में कितनों ने लाठी खाई, कोड़े ओड़े,
[*]और इन्हें झटके देने में कितनों ने निज प्राण गंवाए!
[*]किंतु शहीदों की आहों से शापित लोहा, कच्चा धागा।
[*]एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।
[*]जय बोलो उस धीर व्रती की जिसने सोता देश जगाया,
[*]जिसने मिट्टी के पुतलों को वीरों का बाना पहनाया,
[*]जिसने आज़ादी लेने की एक निराली राह निकाली,
[*]और स्वयं उसपर चलने में जिसने अपना शीश चढ़ाया,
[*]घृणा मिटाने को दुनिया से लिखा लहू से जिसने अपने,
[*]“जो कि तुम्हारे हित विष घोले, तुम उसके हित अमृत घोलो।”
[*]एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।
[*]कठिन नहीं होता है बाहर की बाधा को दूर भगाना,
[*]कठिन नहीं होता है बाहर के बंधन को काट हटाना,
[*]ग़ैरों से कहना क्या मुश्किल अपने घर की राह सिधारें,
[*]किंतु नहीं पहचाना जाता अपनों में बैठा बेगाना,
[*]बाहर जब बेड़ी पड़ती है भीतर भी गाँठें लग जातीं,
[*]बाहर के सब बंधन टूटे, भीतर के अब बंधन खोलो।
[*]एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।
[*]कटीं बेड़ियां औ’ हथकड़ियां, हर्ष मनाओ, मंगल गाओ,
[*]किंतु यहां पर लक्ष्य नहीं है, आगे पथ पर पांव बढ़ाओ,
[*]आजादी वह मूर्ति नहीं है जो बैठी रहती मंदिर में,
[*]उसकी पूजा करनी है तो नक्षत्रों से होड़ लगाओ।
[*]हल्का फूल नहीं आजादी, वह है भारी जिम्मेदारी,
[*]उसे उठाने को कंधों के, भुजदंडों के, बल को तोलो।
[*]एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखित- शहीदों की चिताओं पर

[*]शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
[*]वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।मिट्टी का गोला जो भी देखेगा उसमें तेरी कसम,
[*]कहेगा ये चिता किसी शहीद की, ये चिता किसी शहीद की।मिट्टी में लिपटा हुआ जिसको निगाह न आई,
[*]सुगंध फैलानी होगी उसकी जब फूल खिलाया होगा।खेतों में जो लहू बहाया उनकी,
[*]उसकी महक से आजादी की खुशबू आएगी।शहीदों की चिताओं पर,
[*]जुड़ेंगे हर बरस मेले।
[*]वतन पर मरने वालों का,
[*]यही बाकी निशां होगा।
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दे दी हमें आजादी

[*]दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
[*]साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
[*]आंधी में भी जलती रही गांधी तेरी मशाल
[*]साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
[*]दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
[*]साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल




   धरती पे लड़ी तूने अजब ढब की लड़ाई
दागी न कही तोप न बंदूक चलाई

दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई
वाह रे फकीर खुब करामात दिखाई
चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल




[*]शतरंज बिछा कर यहां बैठा था जमाना
[*]लगता था मुश्किल है फिरंगी को हराना
[*]टक्कर थी बड़े जोर की दुश्मन भी था ताना
[*]पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराण
[*]मारा वो कास के दांव के उल्टी सभी की चाल
[*]साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
[*]दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
[*]साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल




   जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े
मजदूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े
हिन्दू वो मुसलमान
कदमों पे तेरे कोटि कोटि प्राण चल पड़े
फूलों की सेज छोड के दौडे जवाहर लाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल




[*]मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी
[*]लाखो में घूमता था लिए सताय की सोती
[*]वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी
[*]लेकिन तुझे झुकाती थी हिमालय की भी छोटी
[*]दुनिया में तू बेजोड़ था इंसान बेमिसाल
[*]साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
[*]दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
[*]साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल




   जग में कोई जिया है तो बापू तू ही जिया
तूने वतन की राह पे सब कुछ लुटा दिया
माँगा न कोई तख्त न तो ताज ही लिया
अमृत दिया सभी को मगर खुद जहर पिया
जिस दिन तेरी चिता जली
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल
दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल




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