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लखीमपुर की 250 रोडवेज बसों को हरिद्वार में नहीं मिल रहा समय, आय प्रभावित; अभद्रता का आरोप

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जागरण संवाददाता, लखीमपुर। लखीमपुर की एक और गोला डिपो दो बसें उत्तराखंड के हरिद्वार बस स्टेशन तक जाती हैं, जिनको वहां का डिपो प्रशासन सवारियां बैठाने का समय नहीं दे रहा है। इतना ही नहीं वहां के लोग यहां के चालक परिचालक संग गाली गलौज कर मारपीट करने पर तक आमादा हो जाते हैं।

बसों को समय न मिलने से हरिद्वार जाने वाली बसों की आय घटकर आधी रह गई है। ऐसे में गोला और लखीमपुर डिपो के स्टाफ का कहना है कि उत्तराखंड की बसों को भी लखीमुपर बस अड्डे पर समय न देकर जैसे संग तैसा व्यवहार करना चाहिए।

परिवहन निगम के जिले में लखीमपुर और गोला में दो डिपो हैं। इनमें लखीमपुर डिपो में अनुबंधित से लेकर निगम बसों की संख्या 99 तो वहीं गोला डिपो में इनकी संख्या 151 है। लखीमपुर डिपो की एक बस तो वहीं गोला डिपो की दो बसें उत्तराखंड के हरिद्वार तक जाती हैं।

इन बसों के चालक परिचालकों का कहना हैं कि हरिद्वार डिपो में हमारी बसों को समय नहीं दिया जा रहा है। बस पहुंचते ही वहां का स्टाफ अभद्रता करता है। ऐसे में बसों को हरिद्वार डिपो से बाहर ले जाना पड़ता है। इससे आय प्रभावित हो रही है, जबकि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ और देहरादून डिपो की दो बसें जिले तक आती हैं, जिनको सवारियां बैठाने के लिए पर्याप्त समय तक दिया जाता है। जिले की बसों के साथ हरिद्वार में हो रहे व्यवहार देखते हुए जैसे के साथ तैसे का व्यवहार करने की जरूरत है।

घट कर आधी रह रही इनकम

गोला डिपो के केंद्र प्रभारी कमलेश वर्मा बताते हैं कि बसों को खड़ा न होने देने से इनकम घटने के साथ यात्रियों को भी दिक्कत होती है। पहले जहां 70 से 75 फीसद इनकम आती थी, जो घटकर 35 से 40 रह गई है। पहले यात्रियों को बस तलाशने में दिक्कत नहीं होती थी।मगर, डिपो में जगह न मिलने पर चालक परिचालक बसों को इधर उधर खड़ा करते हैं। इससे उन्हें बस तलाशने में दिक्क्त होती है।


बहराइच डिपो में कोई मामला हुआ है। इस वजह से हरिद्वार में यहां की बसों को खड़ा करने में वहां के लोग आपत्ति करते हैं। यह मामला आरएम के संज्ञान में है। उनके स्तर से लिखा पढ़ी की जा रही है। पिथौरागढ़ व देहरादून डिपो की जो बसें कई साल से आ रही हैं, उनका समय भी पहले से निर्धारित है।

-गीता सिंह, एआरएम लखीमपुर डिपो

इस मामले में क्षेत्रीय प्रबंधक को अवगत कराने के साथ व्यक्तिगत रूप से भी अवगत कराया है।उनके स्तर से वहां के प्रशासन को शायद लिखा पढ़ी की भी गई है।

-महेश चंद्र कमल, एआरएम गोला डिपो
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