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फर्जी वेबसाइट बनाकर पंजाब में की करोड़ों रुपये की हेराफेरी, इंजीनियर समेत चार भेजे गए जेल

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फर्जी वेबसाइट बनाकर पंजाब में की करोड़ों रुपये की हेराफेरी।



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। फर्जी वेबसाइट बनाकर पंजाब सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले गोरखपुर के इंजीनियर समेत चार आरोपितों को रुपनगर (पंजाब) पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि तारामंडल क्षेत्र के विवेकपुरम में रहने वाला सॉफ्टवेयर इंजीनियर अखिलेश प्रताप शाही ने फर्जी वेबसाइट विकसित कर अवैध रूप से क्यू-फार्म तैयार किए, जिनका इस्तेमाल रेत और बजरी जैसी निर्माण सामग्री के गैरकानूनी परिवहन में किया जा रहा था।

पंजाब पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पंजाब सरकार के माइंस एंड जियोलाजी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती एक नकली वेबसाइट बनाई थी।

इसी फर्जी पोर्टल के जरिए ट्रकों के लिए क्यू-फार्म जेनरेट किए जाते थे, जिससे जांच एजेंसियों को भ्रमित कर अवैध खनन सामग्री का परिवहन कराया जा सके। अब तक करीब 450 से 500 फर्जी क्यू-फॉर्म बनाए जाने की पुष्टि हुई है, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व क्षति हुई।

इस मामले में रुपनगर जिले के थाना नंगल में 16 जनवरी 2026 को मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस के अनुसार यह एक संगठित गिरोह था, जो तकनीक का दुरुपयोग कर सरकारी व्यवस्था को चकमा दे रहा था।

जिन चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें पंजाब के होशियारपुर स्थित नैनवां में रहने वाले अरुण कुमार उर्फ राणा, रुपनगर के भरतगढ़ के हरिंदरपाल भल्ला उर्फ नोनू, नंगल के गुरमीत सिंह और गोरखपुर के विवेकपुरम,तारामंडल सिद्धार्थ एन्क्लेव में रहने वाले अखिलेश प्रताप शाही शामिल हैं। सभी को पंजाब पुलिस ने न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।

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बंटा हुआ था गिरोह के सदस्यों का काम

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्यों का काम बंटा हुआ था। अरुण कुमार उर्फ राणा ट्रकों के नंबर उपलब्ध कराता था। हरिंदरपाल भल्ला उर्फ नोनू पूरे नेटवर्क का मुख्य समन्वयक था, जो फर्जी क्यू-फार्म ट्रांसपोर्टरों और ड्राइवरों तक पहुंचाता था। गुरमीत सिंह नकली वेबसाइट के जरिए क्यू-फार्म जेनरेट करता था, जबकि अखिलेश प्रताप शाही फर्जी पोर्टल के डिजाइन, डेवलपमेंट और तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी संभालता था।
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