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90-डिग्री का अंधा मोड़ और प्रशासन की लापरवाही, इंजीनियर की मौत के बाद अब बगैर किसी अप्रूवल के दौड़ने लगी फाइल

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सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद घटनास्थल पर मौजूद भीड़। फाइल फोटो- जागरण



प्रवेंद्र सिंह सिकरवार, नोएडा। सॉफ्टवेयर इंजीनियर 27 वर्षीय युवराज मेहता की मौत ने नाकाम सिस्टम को बेनकाब कर दिया है। शिकायतों का तत्परता से निस्तारण के भले ही बढ़ चढ़कर दावे किए जाए, लेकिन वह सब झूठे साबित हो गए हैं। कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई। युवराज की मौत से पहले सिस्टम जागता तो उसके बेबस और बुजुर्ग पिता की आंखों के सामने बेटा पानी के आगोस में न समाता। वह इस समय दुनिया में होता।

90 डिग्री के इस मोड को डेथ प्वाइंट स्थानीय निवासियों ने दो वर्ष पहले बताया। प्राधिकरण सीईओ के पास पहुंची शिकायत में डेथ प्वाइंट को मानचित्र के साथ बताया गया था कि वह कितना घातक हो सकता है। हालांकि, सीईओ ने तत्काल संज्ञान लिया। अधीनस्थ अधिकारियों को रिपोर्ट तैयार कर समस्या समाधान के निर्देश दिए।

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जेई और ऐई ने रिपोर्ट तैयार करने में बरती लापरवाही

सीईओ के निर्देश पर फाइल भी तैयार हुई, लेकिन नाकारा सिस्टम में फाइल ऊपर से नीचे टेबल पर घूमती रही। जेई और ऐई ने रिपोर्ट तैयार करने में लापरवाही बरती। सर्किल प्रभारी, उप महाप्रबंधक सिविल, महाप्रबंधक सिविल, ओएसडी व एसीईओ तक लापरवाही हुई। फाइल पर सिर्फ टिप्पणी और वार्ता लिखकर एक-दूसरे पर मामले को डाला जाता रहा। रिपोर्ट तैयार कर सीईओ तक नहीं भेजी। फाइल महाप्रबंधक सिविल की टेबल पर धूल फांक रही है।

सेक्टर-150 की शिकायतों के हल के लिए सांसद डॉक्टर महेश शर्मा और दादरी विधायक तेजपाल नागर ने भी सीईओ और जिलाधिकारी को पत्र लिखे। सेक्टर की आठ से अधिक सोसायटियों ने दो वर्ष पहले अधूरी सुविधाओं का मुद्दा सोशल मीडिया पर उठाया। लोगों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया। 20 बिंदुओं की शिकायत पर ड्राफ्ट तैयार कर मानचित्र के साथ प्राधिकरण को सौंपा।

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15 दिन पहले हुआ था एक हादसा

साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर और स्ट्रीट लाइट नहीं होने की वजह से दुर्घटना की अंदेशा जाहिर कर शीघ्र कदम उठाने का आग्रह किया। युवराज की मौत से 15 दिन पहले एक ट्रक हादसे का शिकार होकर बेसमेंट के पानी में गिरा था। स्थानीय लोगों ने चालक को बचाया। फिर भी सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

शुक्रवार की देर रात उक्त डेथ प्वाइंट पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हुई तो फाइल बिना किसी अप्रूवल के दौड़ने लगी। बिना मंजूरी के ही मौके पर कार्य होने लगे। अब बिना किसी सवाल और आपत्ति के यह फाइल हर टेबल पर पास भी हो रही है।
समय पर शिकायतें और उनका विवरण

[*]14 अगस्त 2024: भूमिगत विद्युत लाइन और ट्रांसफार्मर के पास पानी भरने की शिकायत पर निगम के एक्सईएन ने वरिष्ठ प्रबंधक-1 ईएंडटी को पत्र लिखा।
[*]20 अगस्त 2024: वरिष्ठ प्रबंधक-1 ईएंडटी ने विद्युत लाइन और ट्रांसफार्मर के पास पानी भरने की शिकायत पर वरिष्ठ प्रबंधक जलखंड-2 को पत्र लिखा।
[*]19 दिसंबर 2025: नालियों पर ड्रेन कवर लगाने की आइजीआरएस की शिकायत पर वर्क सर्कल-10 के वरिष्ठ प्रबंधक ने मिला योजना का कोई कार्य प्रस्तावित नहीं बताया।
[*]8 दिसंबर 2025: साफ सफाई की शिकायत पर जनस्वास्थ्य विभाग के परियोजना अभियंता ने एस्टीमेट तैयार होने तक संविदाकार से कार्य कराने का पत्र स्वीकृति के लिए अधिकारी को भेजने की बात कही।
[*]22 दिसंबर 2025: स्ट्रीट लाइट लगवाने की शिकायत पर ईएंडटी के वरिष्ठ प्रबंधक-4 ने खंडीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए अधिकारी को भेजने की बात कही।
[*]12 जनवरी 2026: स्ट्रीट लाइट लगवाने की शिकायत पर ईएंडटी के वरिष्ठ प्रबंधक-4 ने खंडीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए अधिकारी को भेजने की बात कही।
[*]12 जनवरी 2026: ट्रीट लाइट लगवाने की शिकायत पर ईएंडटी के वरिष्ठ प्रबंधक-4 ने खंडीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए अधिकारी को भेजने की बात एक बार फिर कही।
[*]19 दिसंबर 2025: पेडों की रखरखाव नहीं होने की शिकायत पर उप उद्यान निदेशक ने मानसून में पौधरोपण अभियान और रखरखाव के लिए एस्टीमेट तैयार करने की बात कही।


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