उस रात NDRF डूबते इंजीनियर युवराज के लिए जुटा न सकी एक रस्सी, अब अफसरों की सुरक्षा में बिछाया रस्सियों का जाल
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/20/article/image/rassi3-1768923736374.webpनोएडा सेक्टर 150 में हुई घटना में युवराज मेहता की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी बनाई। जांच के लिए एसआईआईटी के अध्यक्ष मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर, मेरठ मंडल के मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और अन्य सदस्य पहुंचे। सौरभ राय
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। 17 जनवरी की रात जब इंजीनियर युवराज अपनी जान बचाने के लिए कार पर खड़े होकर पिता से अपने आपको को डूबने से बचने की गुहार लगा रहा था, तब बचाव दल के रूप में वहां में मौजूद पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ के 80 जवानों को युवराज तक पहुंचने के लिए 70 फीट लंबी रस्सी नहीं मिल सकी।
आश्चर्य की बात यह है कि घटनास्थल की जांच के लिए जब मंगलवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) पहुंची, तो पुलिस ने उनकी सुरक्षा और मीडिया एवं आम जनमानस को उन तक पहुंचने से रोकने के लिए रस्सियों का जाल बिछा दिया गया। चारों तरफ रस्सियां लगा दी। पुलिस के जवान रस्सियों को जकड़े रहे, ताकि कोई एसआईटी तक पहुंचकर अपनी बात न कर सकें।
एसडीआरएफ को 100 फीट लंबी रस्सी नहीं मिल सकी
लोगों में इस बात को लेकर काफी रोष है कि जब प्रशासनिक अमला आया तो उनकी सुरक्षा के लिए रस्सियों का इंतजाम हो गया, लेकिन उस दिन जब युवराज बेबस पिता के सामने डूबने से बचाने की गुहार लगा रहा था, तब पुलिस, दमकल और एसडीआरएफ को 100 फीट लंबी रस्सी नहीं मिल सकी। यह उत्तर प्रदेश के शो विंडो कहे जाने वाले गौतमबुद्ध नगर में साधन न होने अथवा साधन होने के बाद भी उनका इस्तेमाल न करने पर बड़ा सवाल है। इसका जवाब किसी भी पुलिस, प्रशासन, दमकल विभाग व एसडीआरएफ के पास नहीं है।
सुबह से लग गया अधिकारियों का जमावड़ा
मंगलवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे एसआईटी टीम के रूप में एडीजी व मंडलायुक्त मेरठ व पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर पहुंचे। उनके साथ ही पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, जिलाधिकारी मेधा रूपम समेत पुलिस,प्राधिकरण और प्रशासन के तमाम अधिकारी मौजूद रहे। सुबह से ही पुलिस, प्रशासन और प्राधिकरण अधिकारी उनकी आवभगत के लिए लगे रहे।
https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/01/20/template/image/rassi1-1768923522363.jpgनोएडा सेक्टर 150 में हुई घटना में युवराज मेहता की मौत हो गई। एसआईटी की टीम जांच करने पहुंचने वाली थी तो पुलिस ने वहां पर चारों तरफ रस्सी लगाकर लोगों को और मीडिया कर्मियों को घटनास्थल की तरफ जाने से रोका। सौरभ राय
चारों ओर बिछा दिया रस्सियों का जाल
घटनास्थल के पास आलाधिकारियों की सुरक्षा के नाम पर रस्सियों का जाल बिछा दिया गया। चारों तरफ रस्सी लगा दी गई, ताकि कोई एसआईटी के पास तक न पहुंच सकें। वहां मौजूद लोगों में इस बात को लेकर खासी चर्चा रही कि काश इसी तरह घटना वाले दिन भी पुलिस रस्सी ले आती तो युवराज की जाच बच जाती।
वहीं, दो नाव के जरिये सोनार की मदद से एनडीआरएफ की टीम कार को ढूंढ़ती रही। घटनास्थल के पास वाहन न रुके उसके लिए ट्रैफिक कर्मी तैनात रहे। लेकिन 17 जनवरी की रात यही प्रशासनिक अमला चादर ओढ़े सोता रहा और एक बेबस पिता की आंखों के सामने उसका बेटा मौत के मुंह में धीरे-धीरे समाता चला गया।
आवभगत में जुटे रहे अधिकारी
सेक्टर 150 की जिन सड़कों पर धूल का गुबार उड़ता रहता था, सड़क किनारे कूड़े का ढेर लगा रहता था, नालियों में कूड़ा जमा रहता था। उसी सेक्टर की सड़कों और नालियां को सफाई में कर्मचारी जुटे रहे। सड़कों पर झाड़ू लगती रही, स्माग गन से सड़क और किनारे पर पानी का छिड़काव किया जाता रहा, जिससे कि आलाधिकारियों पर धूल का एक भी कण न बैठ सके। आलाधिकारियों की आवभगत के लिए सुबह से ही पुलिस और प्रशासन का अमला जुटा रहा। घटनास्थल के पास कोई वाहन न रुक सके, उसके लिए ट्रैफिक पुलिस मुस्तैद रही।
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