AIIMS Rishikesh के डाक्टरों ने किया कमाल, आंख में घुसे चूड़ी के टुकड़े को निकाला और बचाई रोशनी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/20/article/image/Doctor-1768933492195.webpसांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। बस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल भिकियासैंण निवासी हंसी को जब एयर लिफ्ट कर एम्स लाया गया तो चिकित्सकों के सामने उसका जीवन बचाने की चुनौती थी साथ ही आंख में घुसे चूड़ी के टुकड़े भी निकालने थे।
जिससे उसकी आंखों की रोशनी बचाई जा सके। इलाज के बाद हंसी की जान और आंख दोनों बच गई। पूरी तरह स्वास्थ होने पर उसे एम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
30 दिसंबर को अल्मोड़ा के भिकियासैंण क्षेत्र में बस दुर्घनाग्रस्त होकर गहरी खाई में जा गिरी थी। दुर्घटना में सात यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
गंभीर रूप से घायल हंसी सती निवासी सिंगोली, अल्मोड़ा को एयर लिफ्ट कर एम्स भेजा गयातो उस दौरान न केवल उसके सिर, कंधे, पीठ और कूल्हे में गंभीर चोटें लगी थीं बल्कि डाक्टरों ने पाया कि दुर्घटना के दौरान हाथ की चूड़ी के कुछ टुकड़े भी उसकी आंखों में घुस गए हैं। जिस वजह से वो आंख भी नहीं खोल पा रही थी।
हंसी का उपचार दो चरणों में किया गया। पहले चरण में ट्रामा सर्जन डा. रूबी कटारिया की टीम ने सर्जरी की और दूसरे चरण में ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के डाक्टरों ने हंसी के आंख के भीतर से चूड़ी के टुकड़े को निकालने के लिए सर्जरी की।
यह सर्जरी दंत चिकित्सा विभाग के सर्जन डा. प्रेम कुमार राठौर व उनकी टीम ने की। ट्रामा सर्जरी और आंखों के भीतर जा पहुंचे चूड़ी के टुकड़ों को निकाले जाने के बाद हंसी अब स्वस्थ है और उन्हें एम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्याश्री ने सर्जरी टीम की सराहना की। है। दंत चिकित्सा विभाग के हेड प्रो. आशी चुग के मार्गदर्शन में हुई इस सर्जरी टीम में डा. प्रेम कुमार राठौड़, डा. आकांक्षा व्यास, डा. नाजिश खान, डा. रोहित लाल, डा. अर्पणा महाजन और डा. सिमरन शाह आदि शामिल रहे।
इस तकनीक से किया आपरेशन
दंत चिकित्सा विभाग के अंतर्गत संचालित ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के सर्जन डा. प्रेम कुमार राठौड़ ने बताया कि बस के नीचे खाई में गिरते समय दुर्घटना के दौरान चूड़ी के टुकड़े घायल की बाईं आंख की आर्बिट में घुस गए थे।
इनमें से एक टुकड़ा 2.5 सेमी साइज का टुकड़ा था जो आंख के गोले (ग्लोब) व हड्डी के मध्य फंसा था। समय पर सर्जरी न होने से आंख की रोशनी भी जा सकती थी। सर्जरी ट्रांस-कंजक्टाइवल तकनीक से की गई।
इस तकनीक में चीरा आंख के अंदर से लगाया जाता है और इससे आंख के आसपास की त्वचा पर कोई निशान भी नहीं पड़ता है।
ट्रामा सर्जन सहित ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के चिकित्सकों की ओर से किया गया यह कार्य सराहनीय है। एम्स ऋषिकेश में उच्च स्तरीय तकनीक आधारित आर्बिटल वाल सर्जरी सहित चेहरे के विभिन्न अंगों की सर्जरी की भी सुविधा उपलब्ध है।
प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश।
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