11 साल बाद मिला इंसाफ: किराएदारों ने मकान मालकिन से बदला लेने के लिए मासूम को उतारा मौत के घाट, अब मिली उम्रकैद
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/court-11-1768938285544.webpप्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। मकान मालकिन से हुए विवाद का बदला लेने के लिए दंपती ने उनकी 13 वर्षीय बेटी को गला दबाकर मार डाला। शव कमरे में फंदे से लटका दिया। माता पिता ने भी मान लिया कि बेटी ने झगड़े व मारपीट से परेशान होकर जान दे दी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सच्चाई से पर्दा उठा दिया। मामला आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का निकला।
अपर जिला जज शिवकुमार तृतीय विशेष जज पाक्सो कोर्ट ने दोषी पति पत्नी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पुवायां के हरदयाल कूचा मुहल्ला निवासी सत्यपाल ने बताया कि वह 18 नवंबर 2013 को वह अपने गांव इकघरा गौटिया गए हुए थे। उनकी पत्नी रजनी का किसी बात को लेकर किरायेदार अनावा गांव निवासी दिनेश मिश्रा से विवाद हो गया।
इसको लेकर पत्नी शिकायत करने थाने चलीं गईं। घर पर 13 वर्षीय बेटी विभूति अकेली थी। सत्यापाल ने बताया कि इस बीच वह घर पहुंचे तो कमरे में बेटी का शव पंखे पर फंदे से लटक रहा था। उन्हें लगा कि बेटी ने मां के साथ हुई मारपीट से तंग आकर यह कदम उठाया है। दिनेश व उसकी पत्नी रचना के विरुद्ध तहरीर दी, जिसमें दोनों को बेटी की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार बताया।
पुलिस ने प्राथमिकी भी दर्ज कर ली, लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि विभूति की मृत्यु गला दबाने से हुई थी। जिस पर प्राथमिकी को हत्या की धारा में तरमीम करते हुए दंपती को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इस मुकदमे में विवेचना के उपरांत आराेपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
जहां-जहां बचाव पक्ष की ओर से तमाम दलीलें दीं गईं, लेकिन शासकीय अधिवक्ता के शिव कुमार सिंह के तर्क, साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पर अपर जिला जज ने दिनेश मिश्रा व उसकी पत्नी रचना मिश्रा को विभूति की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों पर पर एक-एक लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।
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