धर्मशाला और शाहपुर में बनेगी ईको फ्रेंडली जिपलाइन, सालाना लाखों रुपये होगी कमाई; शिमला रोपवे के लिए नए सिरे से टेंडर नहीं
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/20/article/image/Zipline-Dharamshala-1768910718413.webpधर्मशाला और शाहपुर के बीच जिपलाइन बनेगी। प्रतीकात्मक फोटो
राज्य ब्यूरो, शिमला। पर्यटन राजधानी कांगड़ा में धर्मशाला के पास नड्डी में बनने वाली जिपलाइन ईको फ्रेंडली होगी। इसके निर्माण में एक भी पेड़ नहीं कटेगा, न ही यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगी। 7.41 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली जिपलाइन 4.3 किलोमीटर लंबी होगी। इसमें तीन सेंक्शन होंगी। यानी पर्यटक पूरे रूट पर नहीं जाना चाहते तो बीच में भी उतर व चढ़ सकते हैं।
40 साल बाद सरकार की होगी परियोजना
पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप (पीपीपी) मोड के तहत इसका निर्माण निजी कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी 40 वर्ष तक इसका संचालन करेगी। उसके बाद यह परियोजना सरकार को वापस आ जाएगी। प्रतिवर्ष कंपनी राज्य सरकार को 50 लाख रुपये की हिस्सेदारी देगी। हर साल इसमें पांच प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।
शाहपुर व धर्मशाला के बीच बनेगी
शिमला में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि शाहपुर और धर्मशाला दो विधानसभा क्षेत्रों के बीच में यह जिपलाइन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनेगी। इसके निर्माण को मंजूरी दे दी है, जल्द ही इसका काम शुरू हो जाएगा। राज्य सरकार का इसके निर्माण में कोई भी पैसा खर्च नहीं होगा। धर्मशाला के पर्यटन को इससे और ज्यादा बढ़ावा मिलेगा।
तारादेवी-शिमला रोपवे बनाने को नए सिरे से नहीं होगा टेंडर
तारादेवी से शिमला के बीच बनने वाले एशिया के सबसे लंबे रोपवे निर्माण के लिए सरकार तैयार हो गई है। इस परियोजना के लिए केवल एक ही कंपनी ने आवेदन किया था। सरकार नए सिरे से टेंडर नहीं करेगी, बल्कि उसी कंपनी को काम अवार्ड कर देगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। इसमें कहा गया है कि पांच साल पहले मंजूर हुई इस परियोजना की लागत 1734 करोड़ से बढ़कर 2309 करोड़ रुपये पहुंची है।
परियोजना की लागत बढ़ने का मुख्य कारण अनौपचारिकताएं पूरा करना है। न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) पोषित इस परियोजना में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकार की है। 1734 करोड़ रुपये की लागत के अनुसार हिमाचल सरकार को 346.80 करोड़ खर्च करना था। लेकिन, लागत बढ़ने से हिस्सेदारी बढ़कर 500 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। अग्निहोत्री ने कहा कि आरटीडीसी ने तीन बार ग्लोबल टेंडर निकाला लेकिन अंत तक एक ही कंपनी आई।
अब आगे क्या
केंद्र सरकार के आर्थिक मामले मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद रोपवे परियोजना की डीपीआर को संशोधित करके न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) को भेजना पड़ेगा।एनडीबी इसके लिए ऋण देगा। ऐसे में राज्य सरकार इस मामले को दोबारा से केंद्र सरकार और एनडीबी के समक्ष उठाना पड़ेगा। एनडीबी की निदेशक मंडल में यह मामला जाएगा। उसके बाद परियोजना आगे बढ़ेगी।
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