शिकायत पर सोती रही पुलिस, करोड़ों रुपये हड़पने वाले फरार; वन निगम के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/fraud-1768965501691.webpबैंक ऑफ इंडिया ने नौ जनवरी को दी थी सदर पुलिस को शिकायत
पुलिस ने नहीं दर्ज की एफआईआर तो सीबीआई के पास पहुंचा बैंक
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। बैंक ऑफ इंडिया की लखनऊ के सदर बाजार स्थित शाखा में फर्जी खाता खुलवा कर 6.95 करोड़ रुपये हड़पने के मामले में शिकायत के बाद भी पुलिस सोती रही और आरोपित फरार हो गए।
इस संदर्भ में नौ जनवरी को बैंक के अधिकारियों ने थाना सदर पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने न तो आरोपितों की गिरफ्तारी का प्रयास किया और न ही एफआईआर दर्ज की।
नतीजतन एक सप्ताह बाद बैंक ने 15 जनवरी को सीबीआई को शिकायत की। उसी दिन सीबीआई ने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए कोलकाता, दिल्ली, गाजियाबाद और कानपुर में छापेमारी की, लेकिन तब तक आरोपित फरार हो चुके थे।
सीबीआई को दी गई शिकायत में बैंक ने स्पष्ट आरोप लगाए हैं नौ जनवरी को पुुलिस को आनलाइन शिकायत की गई थी, जिसका शिकायत नंबर 33101260006869 था। साथ ही इसी दिन बैंक ने सदर थाने को भी लिखित शिकायत की थी, लेकिन बैंक की शिकायत को पुलिस ने गंभीरता से लिया ही नहीं। बैंक ने इसके बाद सीबीआई को शिकायत की थी।
इस बारे में एसीपी सदर अभय प्रताप मल का कहना है कि बैंक की तरफ से शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। शिकायत नंबर और लिखित शिकायत के बाबत उन्होंने कहा कि मामला गाजीपुर थाने में दर्ज किया गया था, इसलिए सदर थाने में एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
वह इस प्रश्न का उत्तर देने से बचते रहे कि सदर थाने में बैंक ने नौ जनवरी को शिकायत की थी और गाजीपुर में वन निगम की शिकायत पर 13 को एफआईआर दर्ज की गई इस बीच सदर पुलिस ने करोड़ों रुपये हड़पने के मामले में क्या कार्रवाई की।
यह है मामला
वन निगम की एफडी के एक वर्ष पूरे होने पर निगम ने दूसरे बैंकों से एफडी के लिए निविदा मांगी थी। यह प्रक्रिया चल ही रही थी कि दीपक संजीव सुवर्णा और अनीष उर्फ मनीष ने सदर बाजार की बैंक ऑफ इंडिया शाखा में संपर्क कर खुद को वन निगम का कर्मचारी बताकर 64,82,21,365 रुपये की एफडी करवा ली थी।
साथ ही एक बचत बैंक खाता खुलवाकर उसके माध्यम से 6.95 करोड़ रुपये कोलकाता व नई दिल्ली में स्थित विभिन्न बैंकों की शाखा में स्थानांतरित करवा लिए थे। सीबीआई इस मामले में आरोपितों के साथ वन निगम और बैंक के भी कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की भी जांच कर रही है।
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