उत्तराखंड में सभी परियोजनाओं में थर्ड पार्टी मॉनीटरिंग अनिवार्य, सिंचित क्षेत्र को दोगुना करेगा सिंचाई विभाग
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/cs-1768967534278.webpमुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्वतंत्र थर्ड पाटी मूल्यांकन को मजबूत मैकेनिज्म तैयार करने के दिए निर्देश। जागरण
राज्य ब्यूरो, देहरादून।उत्तराखंड में संचालित सभी परियोजनाओं में अब थर्ड पार्टी मूल्यांकन अनिवार्य किया जा रहा है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वित्त एवं नियोजन विभाग को कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के दृष्टिगत थर्ड पार्टी मूल्यांकन को मजबूत मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं में थर्ड पार्टी मूल्यांकन का प्रविधान नहीं है, उनमें इसे तत्काल किया जाए। साथ ही यह भी कहा कि जिम्मेदारी तय करते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई करना भी सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव ने मंगलवार को सचिवालय में पूंजीगत व्यय, सीएसएस, ईएसपी व नाबार्ड योजनाएं, एसएएससीआइ, एसएनए स्पर्श एंव विभागों की व्यय योजनाओं के संबंध में बैठक ली। उन्होंने सभी परियोजनाओं को समय से पूर्ण करने के लिए समयसीमा निर्धारित करते हुए मानीटरिंग पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। परियोजनाओं में थर्ड पार्टी मूल्यांकन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नियोजन विभाग में सूचीबद्ध एजेंसियों के माध्यम से भी विभिन्न विभाग थर्ड पार्टी मूल्यांकन तत्काल शुरू कर सकते हैं। उन्होंने पूंजीगत व्यय, सीएसएस, ईएपी व नाबार्ड पोषित योजनाओं के प्रस्ताव समय पर भेजने के निर्देश दिए। साथ ही प्रतिपूर्ति दावा भी समय से करने को कहा।
पेयजल विभाग को जीरो कार्बन का लक्ष्य
मुख्य सचिव ने पेयजल विभाग को उसके द्वारा संचालित योजनाओं में जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि जल संस्थान व पेयजल निगम को अपनी योजनाओं को जीरो कार्बन उत्सर्जन की ओर ले जाने की दिशा में कार्य करते हुए सोलर बैटरी से जोड़ना चाहिए। जलवायु परिवर्तन फंड का उपयोग इसके लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को किस तरह से अपने प्रोजेक्ट में ऊर्जा के स्रोत के रूप में प्रयोग किया जाए, इसका प्रस्ताव तैयार किया जाए। उन्होंने पेयजल विभाग को सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की सातों दिन 24 घंटे रियल टाइम मानीटरिंग मैकेनिज्म तैयार करने को भी कहा।
सिंचित क्षेत्र को 15 से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करेगा सिंचाई विभाग
सिंचाई विभाग को राज्य में सिंचित 15 प्रतिशत क्षेत्र को अगले पांच साल में 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य सिंचाई विभाग को दिया गया। मुख्य सचिव ने इसके लिए विभाग को अच्छे व गुणवत्तापूर्ण प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि नए बैराज, नहरें आदि पर काम किया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशभर में टपक सिंचाई सिस्टम शुरू कराने, जहां सिंचाई तंत्र ध्वस्त या बंद पड़ा है उसे दुरुस्त कराने और लघु सिंचाई विभाग को गुणवात्तपूर्ण प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
दून में 31 मार्च तक सभी सरकारी कालोनियों में लगेंगे वाटर मीटर
मुख्य सचिव ने जल संस्थान को 31 मार्च तक देहरादून की सभी सरकारी कालोनियों में शत-प्रतिशत वाटर मीटर लगाने का लक्ष्य दिया। साथ ही प्रदेश के सभी नगर निगम क्षेत्रों को भी वाटर मीटर से संतृप्त करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे पानी की बर्बादी पर रोक लगेगी। उन्होंने जल संस्थान को पेयजल की गुणवत्ता के दृष्टिगत तंत्र को मजबूत करने और दूषित पानी की शिकायत पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने देहरादून के लिए महत्वपूर्ण सौंग बांध परियोजना के तहत पेयजल घटक की डीपीआर सप्ताहभर में शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले उपचारित जल का सिंचाई व निर्माण कार्यों के लिए उपलब्ध कराने पर बल दिया। जल संस्थान से कहा गया कि वह इस संबंध में सिंचाई विभाग के समन्वय से प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया।
टिहरी बनेगा अंतरराष्ट्रीय गंतव्य
टिहरी को अंतरराष्ट्रीय गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए शीघ्र कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी मुख्य सचिव ने दिए। साथ ही टिहरी झील रिंग रोड परियोजना को शीघ्र प्रारंभ करने पर जोर दिया। उन्होंने पर्यटन विभाग को टिहरी, ऋषिकेश व चंपावत में पर्यटन क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव बनाने को कहा। इसके अलावा शहरी विकास विभाग को देहरादून सहित अन्य बड़े शहरों में पार्क स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने वन विभाग को सिटी ग्रीनिंग व एक्सप्रेस-वे के प्रस्ताव व बायोफेंसिंग माडल प्रोजेक्ट तैयार करने, आइटी विभाग को साइंस सिटी व विज्ञान केंद्रों की स्थापना के साथ ही इनके संचालन की व्यवस्था का मैकेनिज्म तैयार करने को कहा।
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