लापरवाह ड्राइविंग से महिला मरीज की मौत, रिनपास निदेशक डॉ. जयति सिमलाई पर चलेगा आपराधिक मुकदमा
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/rinpas-diretor-1768975021878.webpतेज व लापरवाह ड्राइविंग से महिला मरीज की मौत पर फंसी डॉ जयति।
जागरण संवाददाता, रांची। रिनपास (रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज) की वर्तमान प्रभारी निदेशक डॉ. जयति सिमलाई की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महिला मरीज की मौत से जुड़े मामले में उनके खिलाफ अब आपराधिक मुकदमा चलेगा। रांची सिविल कोर्ट ने तेज और लापरवाह ड्राइविंग के आरोप में डॉ. सिमलाई पर भारतीय दंड संहिता की धारा 279 और 304-A के तहत केस चलाने का आदेश दिया है।
यह आदेश शिकायतवाद संख्या 10777/2022 की सुनवाई के बाद न्यायिक दंडाधिकारी रांची-24 सुश्री ऋत्विका सिंह ने 20 जनवरी को पारित किया। शिकायत झामुमो रांची जिला के संयोजक सदस्य एवं समाजसेवी सोनू मुंडा द्वारा दायर की गई थी।
क्या है पूरा मामला
मामला 2 मार्च 2022 का है, जब रिनपास में इलाजरत महिला मरीज तैरु निशा को तत्कालीन मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. जयति सिमलाई की कार से कथित तौर पर धक्का लग गया था। हादसे में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इलाज के लिए उसे रिम्स में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
आरोप है कि घटना के समय डॉ. जयति सिमलाई रिनपास परिसर में तेज और लापरवाही से वाहन चला रही थीं। बाद में इस हादसे को पेड़ से गिरने की घटना बताकर मामले को दबाने की कोशिश की गई।
पुलिस रिपोर्ट पर उठे सवाल
न्यायालय के निर्देश पर कांके थाना कांड संख्या 198/2022 दर्ज कर जांच हुई। हालांकि पुलिस ने गवाहों के बयान लिए बिना साक्ष्य के अभाव का हवाला देते हुए अंतिम प्रतिवेदन में डॉ. सिमलाई को निर्दोष बताया। इस रिपोर्ट को शिकायतकर्ता सोनू मुंडा ने अदालत में चुनौती दी।
कोर्ट का अहम फैसला
शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता ईशान रोहन ने अदालत में गवाहों के बयान प्रस्तुत किए, जिन पर विचार करते हुए न्यायालय ने डॉ. जयति सिमलाई के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी। इसे पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी न्यायिक जीत माना जा रहा है।
पद पर बने रहने को लेकर उठे सवाल
गौरतलब है कि डॉ. जयति सिमलाई प्राध्यापक नहीं होने के बावजूद वर्तमान में रिनपास की प्रभारी निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में उनके पद पर बने रहने से मामले के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
यह मामला न केवल एक महिला मरीज की मौत से जुड़ा है, बल्कि चिकित्सा संस्थानों की जवाबदेही और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सबकी निगाहें आगे की न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
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