अब ट्रैफिक चालान के नाम पर साइबर ठगी: मोटरसाइकिल और कार मालिकों को भेजे जा रहे फर्जी मैसेज
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/20/article/image/cyber-thag-hazaribag-1768914560754.webpफर्जी चालान के संदेशों से सतर्क रहें, जानकारी साझा न करें।
संवाद सूत्र, कटकमसांडी। सावधान हो जाइए! साइबर ठग एक बार फिर नए और बेहद खतरनाक तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस बार ठगों ने मोटरसाइकिल और कार मालिकों को अपना शिकार बनाया है। यातायात विभाग के नाम से फर्जी चालान और पेनाल्टी के मैसेज भेजकर लोगों से ठगी की जा रही है। वाहन का नंबर भी असली होता है।
कैसे हो रही है नई साइबर ठगी
जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधी वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर का हवाला देकर मोबाइल पर एसएमएस भेज रहे हैं। इन संदेशों में लिखा होता है कि संबंधित वाहन से जुड़ा चालान, जुर्माना या कोई जरूरी सूचना लंबित है, जिसे देखने या निपटाने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करना जरूरी है।
जैसे ही व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता है, उसका मोबाइल या बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी साइबर ठगों के हाथ लग जाती है। इसके बाद कुछ ही पलों में बैंक खाते से पूरी रकम साफ कर दी जाती है।
वाहन नंबर देखकर लोग हो रहे हैं गुमराह
साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि संदेश में सटीक वाहन संख्या लिखी होने के कारण लोग इसे असली समझ लेते हैं और बिना जांच-पड़ताल किए लिंक खोल देते हैं। यही लापरवाही उनके लिए भारी नुकसान का कारण बन रही है। वर्तमान समय में यह ठगी का तरीका तेजी से फैल रहा है और कई लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं।
कटकमसांडी में सामने आया मामला
इसी तरह का एक मामला हेदलाग गोविंदपुर निवासी रोहित यादव के साथ सामने आया। रोहित यादव को भी वाहन संख्या से जुड़ा एक संदिग्ध संदेश प्राप्त हुआ। हालांकि उन्होंने सतर्कता दिखाते हुए लिंक पर क्लिक नहीं किया और पहले इसकी जानकारी जुटाई।
जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि संदेश पूरी तरह फर्जी था और यह साइबर ठगी का नया हथकंडा है। रोहित यादव ने समय रहते लोगों को भी इस बारे में सचेत किया। इससे पहले भी फर्जी चालान से ठगी के मामले सामने आ चुके हैं।
लिंक पर क्लिक करते ही क्या होता है?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही:
[*]मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी चोरी हो जाती है
[*]बैंक खाते, यूपीआई और ओटीपी से जुड़ी सूचनाएं अपराधियों तक पहुंच जाती हैं
[*]कई मामलों में मोबाइल में मैलवेयर (हानिकारक सॉफ्टवेयर) इंस्टॉल हो जाता है
[*]बाद में भी खाते से पैसे निकाले जा सकते हैं
[*]इस तरह कुछ ही मिनटों में लोगों की सालों की मेहनत की कमाई खत्म हो जाती है।
आम लोगों से अपील: रहें सतर्क, रहें सुरक्षित
साइबर ठगी से बचाव के लिए आम लोगों से अपील की जा रही है कि
[*]किसी भी अनजान या संदिग्ध मैसेज पर भरोसा न करें
[*]वाहन नंबर, चालान, केवाईसी अपडेट, इनाम या चेतावनी से जुड़े संदेशों की पहले पुष्टि करें
[*]बिना जांच किए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें
[*]अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी साझा न करें
ठगी की आशंका हो तो तुरंत करें शिकायत
यदि किसी को संदेह हो कि प्राप्त संदेश साइबर ठगी से जुड़ा है, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय साइबर सेल या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें। थोड़ी-सी सतर्कता और जागरूकता से इस तरह की साइबर ठगी से खुद को और दूसरों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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