वक्फ बोर्ड के गठन पर जदयू का खुला मोर्चा, पटना दरबार तक पहुंचा भागलपुर का सियासी संग्राम
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/Waqf-Board-and-JDU-1768977783135.webpWaqf Board and JDU : जदयू की बैठक
जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिला सुन्नी वक्फ बोर्ड के गठन ने सियासी गलियारों में नई उथल-पुथल पैदा कर दी है। जनता दल यूनाइटेड ने इस पूरे मामले को संगठन और अल्पसंख्यक समाज दोनों के साथ अन्याय करार देते हुए खुला मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि वक्फ जैसी संवेदनशील और अहम संस्था को कुछ सीमित लोगों के राजनीतिक एजेंडे का औजार बना दिया गया है। इसी मुद्दे को लेकर जदयू का एक प्रतिनिधिमंडल पटना पहुंचा और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मिलकर मौजूदा कमिटी को भंग करने की मांग के साथ ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी, विधान पार्षद ललन सर्राफ और राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा से मुलाकात कर दस्तावेजों के साथ अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। शीर्ष नेतृत्व ने पूरे मामले को गंभीरता से सुनते हुए निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला हो सकता है।
ज्ञापन महानगर जिलाध्यक्ष संजय साह, पूर्व महानगर अध्यक्ष सुड्डू साईं और वरिष्ठ नेता राकेश ओझा के नेतृत्व में सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल में शमीम रिजवी, शाबान बदर खान, मुमताज आलम, फजीर अंसारी और फरीद-उल-जमा समेत कई नेता और कार्यकर्ता शामिल थे।
वरिष्ठ नेता राकेश ओझा ने दो टूक कहा कि वक्फ बोर्ड का मौजूदा गठन न तो सामाजिक संतुलन का सम्मान करता है और न ही संगठन की निष्ठा का। उन्होंने आरोप लगाया कि जदयू-एनडीए के लिए वर्षों से समर्पण के साथ काम करने वाले अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं को हाशिये पर धकेल दिया गया है, जबकि ऐसे चेहरों को आगे कर दिया गया है जिनकी न संगठन में पकड़ है और न समाज में विश्वसनीयता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई पदों की नहीं, बल्कि व्यवस्था की साख और संगठन की विश्वसनीयता बचाने की है। अब सबकी निगाहें जदयू नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं, जो इस सियासी संग्राम की दिशा तय करेगा।
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