Chikheang Publish time 2026-1-21 15:57:01

आरक्षण रोस्टर विवाद पर हाई कोर्ट में सुनवाई, राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब तलब

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/nikay-vivad-1768990435609.webp

रोस्टर विवाद पर हाई कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग से मांगा जवाब।



राज्य ब्यरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट में आज (21 जनवरी ) शहरी निकाय चुनावों में मेयर एवं नगर परिषद अध्यक्ष पदों के आरक्षण रोस्टर के निर्धारण पर याचिका की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने दलील दी कि पदों का आवंटन संविधान के निर्धारित क्रम (रोस्टर) के अनुसार नहीं किया गया, जो अनुचित है।

अदालत ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की गई है। यह याचिका राज्य स्तर पर रोस्टर की वैधता पर केंद्रित है, जहां जनसंख्या आधारित संतुलन न होने का आरोप प्रमुख है।
राज्य निर्वाचन आयोग की हालिया आरक्षण सूची: 9 जनवरी 2026 को जारी

राज्य निर्वाचन आयोग ने 9 जनवरी 2026 को शहरी निकायों के लिए आरक्षण सूची जारी की, जिसके बाद विभिन्न जगहों पर असंतोष और संभावित चुनौतियां सामने आई हैं। मुख्य आरक्षण इस प्रकार हैं।

[*]रांची मेयर पद: अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित
[*]धनबाद मेयर पद: अनारक्षित
[*]गिरिडीह मेयर पद: अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित
[*]हजारीबाग: अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1
[*]मेदिनीनगर (पलामू): महिला आरक्षित
[*]देवघर, चास, बोकारो: अनारक्षित


इस सूची के बाद चुनावी तैयारियां तेज हुई हैं, लेकिन रोस्टर विवाद जारी है।
धनबाद में रोस्टर विवाद: अदालती चुनौती जारी

धनबाद नगर निगम में मेयर पद को अनारक्षित रखने के फैसले पर विवाद बरकरार है। 9 जनवरी की सूची में इसे अनारक्षित घोषित किया गया, लेकिन एससी आबादी अधिक होने के बावजूद आरक्षण न देने पर सवाल उठे हैं। पिछले महीनों में याचिकाएं दायर हुईं, जिसमें दो वर्गों में बंटवारे के प्रावधान को चुनौती दी गई।

हाई कोर्ट में एक याचिका (शांतनु कुमार चंद्रा द्वारा) पर नवंबर 2025 में सुनवाई हुई थी, जहां सरकार से जवाब मांगा गया। हालिया अपडेट में कोई नया फैसला नहीं आया, लेकिन चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
गिरिडीह में रोस्टर विवाद: SC आरक्षण पर चुनौती

गिरिडीह नगर निगम के मेयर पद को SC के लिए आरक्षित करने के फैसले को चुनौती दी गई है। 9 जनवरी की सूची में इसे SC (अन्य) के लिए आरक्षित रखा गया। याचिकाकर्ता मो. नसीम की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हो चुकी है, और फैसला सुरक्षित रखा गया।

तर्क है कि यहां OBC आबादी 65% से अधिक है, इसलिए पद OBC के लिए होना चाहिए। रोस्टर और जनसंख्या आधारित आवंटन पर सवाल बने हुए हैं।
अन्य निकायों में विवाद: चुनाव आयोग की तैयारी पूरी

रांची, हजारीबाग और देवघर जैसे जिलों में भी रोस्टर से जुड़े मुद्दे राज्य स्तर के आरक्षण नीति से प्रभावित हैं। हाईकोर्ट ने पहले OBC आरक्षण के ट्रिपल टेस्ट के बहाने चुनाव टालने पर सरकार को फटकार लगाई थी।

निकाय चुनावों को चार महीनों में कराने के निर्देश दिए थे। जनवरी में फाइलन रोस्टर जारी होने के बाद कुछ जगहों से विवाद सामने आए हैं। जो मुख्य रूप से आरक्षण रोस्टर की वैधता और जनसंख्या आधारित आवंटन पर केंद्रित हैं। अगली सुनवाई में स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। इधर चुनाव आयोग निकाय चुनाव की पूरी तैयारी कर चुका है। शीघ्र ही अधिसूचना जारी होनी है।
Pages: [1]
View full version: आरक्षण रोस्टर विवाद पर हाई कोर्ट में सुनवाई, राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब तलब