दुर्घटना में घायल हुआ था युवक, आय और स्थायी विकलांगता नहीं कर पाया साबित, अपेक्षा से कम मिला मुआवजा
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/muaa3-1768997944212.webpपंचकूला मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने सुनाया फैसला।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। पंचकूला मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने सड़क हादसे में गंभीर घायल युवक को 1 लाख 68 हजार 440 रुपये मुआवजा देने का आदेश सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि घायल अपनी मासिक आय का दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं कर सका और मेडिकल रिकाॅर्ड में स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी विकलांगता ही पाई गई। इन्हीं कारणों से 30 लाख के दावे के मुकाबले मुआवजे की राशि सीमित रह गई।
रायपुररानी तहसील के गांव गढ़ी कोटाहा के रहने वाला 25 वर्षीय कार्तिक एक अक्टूबर 2024 की रात मोटरसाइकिल से अपने घर लौट रहा था। रात करीब 12:40 बजे चंडीगढ़ के माखन माजरा स्थित पेप्सी टर्न के पास पीछे से तेज रफ्तार और लापरवाही से आई हुंडई कार ने उसकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार्तिक सड़क पर गिर गया और उसके सिर, चेहरे, माथे, छाती, हाथों व पैरों में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उसे पीसीआर के माध्यम से जीएमसीएच सेक्टर-32, चंडीगढ़ ले जाया गया, जहां वह एक अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2024 तक भर्ती रहा।
इस दुर्घटना के संबंध में पुलिस में कार चालक के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ। कार्तिक ने ट्रिब्यूनल में दावा किया कि वह एक निजी फाइनेंस कंपनी में सेल्स प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत था और हर महीने करीब 20 हजार रुपये कमाता था।
उसने यह भी कहा कि हादसे के कारण उसे स्थायी विकलांगता हो गई है, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हुई और वह भविष्य में अपनी आजीविका ठीक से नहीं कमा पाएगा। इन्हीं आधारों पर उसने 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी।
याचिकाकर्ता मासिक आय और विकलांगता संबंधित सबूत नहीं कर पाया पेश
ट्रिब्यूनल ने अपने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ता अपनी मासिक आय से संबंधित कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इसके अलावा मेडिकल रिकाॅर्ड के अवलोकन से यह सामने आया कि उसे स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी विकलांगता हुई है, जिसे 30 प्रतिशत तक बताया गया था, लेकिन वह भी ट्रिब्यूनल के समक्ष विधिवत प्रमाणित नहीं हो सकी।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ट्रिब्यूनल ने आय की हानि और विकलांगता के आधार पर बड़े मुआवजे का दावा स्वीकार नहीं किया। ट्रिब्यूनल ने उपचार से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर दवाइयों और इलाज के खर्च, उपचार के दौरान आय की हानि, दर्द व पीड़ा, विशेष आहार और अस्पताल आने-जाने के खर्च को मान्य किया। इन सभी मदों को जोड़ते हुए कुल 1,68,440 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया। इसलिए चालक, मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया गया।
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