JPSC नियुक्ति मामले में 342 सफल अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाने का निर्देश; कापी मूल्यांकन में नियमों की अनदेखी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/JPSC-1768999075542.webpजेपीएससी 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के काफी मूल्यांकन में नियमों की अनदेखी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा के परिणाम निरस्त करने को लेकर दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद अदालत ने मुख्य परीक्षा के सभी सफल 342 अभ्यर्थियों को दो सप्ताह में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है। इस संबंध में अयूब तिर्की एवं अन्य की हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने अदालत को बताया कि झारखंड लोक सेवा आयोग का नियम है कि 10 वर्ष और पांच वर्ष के अनुभवी शिक्षक ही काफी का मूल्यांकन करेंगे।
जेपीएससी ने अपने ही बनाए नियमों की अनदेखी की
लेकिन आयोग ने अपने ही बनाए गए नियम की अनदेखी की है और महज एक-डेढ़ साल से शैक्षणिक कार्य कर रहे घंटी आधारित टीचरों से कापी का मूल्यांकन कराया गया है, जो कि गलत है।
उन्होंने कोर्ट से मुख्य परीक्षा का परिणाम निरस्त कर फिर से कापी का मूल्यांकन करा परिणाम घोषित करने का आग्रह किया।
झारखंड लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रार्थी का यह आरोप गलत है।
उन्होंने अदालत को बताया कि नियम सबके लिए बराबर है। प्रार्थी असफल हुए हैं, इसलिए नियम को चुनौती दे रहे हैं। इन्हें पहले ही नियम को चुनौती देनी चाहिए थी। प्रार्थी की याचिका एकल पीठ ने खारिज कर दी है।
इसलिए इस अपील याचिका भी खारिज कर दी जाए। सुनवाई के बाद अदालत ने प्रार्थी को सभी सफल प्रतिभागियों को दो सप्ताह में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया।
इस मामले में हाई कोर्ट की एकलपीठ ने अक्टूबर 2025 में 11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी मेंस परीक्षा के परिणाम को निरस्त करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दी थी।
अदालत ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया था कि याचिकाकर्ता की आपत्तियां समयबद्ध नहीं थीं। इसके साथ ही अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
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