उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग में 1550 मेगावाट की गिरावट, मौसम के मिजाज ने मांग पर डाला असर
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/bijali-1769001128596.webpआंकड़ों के अनुसार जनवरी के मध्य में ठंड के असर के चलते बिजली की मांग में तेजी से इजाफा हुआ था।
जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र)। प्रदेश में मौसम में आए अचानक बदलाव का सीधा असर अब बिजली की मांग पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। बीते पांच दिनों से न्यूनतम और अधिकतम तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के चलते प्रदेश की बिजली मांग में करीब 1550 मेगावाट की गिरावट दर्ज की गई है। इससे बिजली प्रबंधन को काफी राहत मिली है। आंकड़ों के अनुसार जनवरी के मध्य में ठंड के असर के चलते बिजली की मांग में तेजी से इजाफा हुआ था।
16 जनवरी को प्रदेश में बिजली की मांग 23 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई थी, जिससे आपूर्ति बनाए रखना बिजली प्रबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। हालांकि इसके बाद मौसम के मिजाज में बदलाव शुरू हुआ और 17 जनवरी से कई जिलों में दिन और रात दोनों समय तापमान में वृद्धि दर्ज की गई। तापमान बढ़ने के साथ ही हीटर और अन्य विद्युत उपकरणों के उपयोग में कमी आई। जिसका सीधा प्रभाव बिजली की खपत पर पड़ा।
परिणामस्वरूप प्रदेश की बिजली मांग में लगातार गिरावट दर्ज की जाने लगी और 20 जनवरी तक यह घटकर 21489 मेगावाट तक पहुंच गई। बिजली मांग में आई इस कमी से उत्पादन और आपूर्ति के संतुलन को बनाए रखने में बिजली प्रबंधन को सहूलियत मिली है। अधिकारियों का कहना है कि मांग में कमी आने से न केवल उत्पादन इकाइयों पर दबाव घटा है, बल्कि आपूर्ति व्यवस्था को भी अधिक सुचारू रूप से संचालित किया जा सका है। हालांकि मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए बिजली प्रबंधन पूरी तरह सतर्क है।
मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण आने वाले दिनों में बिजली की मांग में फिर उतार-चढ़ाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए बिजली प्रबंधन द्वारा मांग के अनुरूप उत्पादन और आपूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारियां जारी हैं, ताकि किसी भी स्थिति में प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलती रहे।
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