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पश्चिमी सिंहभूम में हाथियों का तांडव: मझगांव में 9 घर तोड़े, मलबे में दबे 5 बच्चे; चाईबासा में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

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मझगांव में मंगलवार देर रात हा‍थियों के आक्रमण से घर ध्‍वस्‍त हो गया। इसके बाद मलबे में दबे बच्‍चों को निकाला गया बाहर।


जागरण टीम, मझगांव/चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड में मंगलवार देर रात एक विशाल दंतैल हाथी ने कई गांवों में जमकर उत्पात मचाया। जिससे आधा दर्जन से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए और कई लोग घायल हो गए। वहीं, वन विभाग की उदासीनता से नाराज चाईबासा के नीमडीह ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
मझगांव: मलबे में दबे बच्चे, दंपत्ति को हाथी ने पटका मझगांव में वन विभाग के 100 कर्मियों के कैंप हटाते ही हाथियों ने फिर हमला बोल दिया। सोनापोसी पंचायत के बास्की गांव में रामसिंह चातार और काया चातार के घर तोड़ने के बाद हाथी चत्रीसाई गांव पहुंचा।    यहां सुखलाल पिगुंवा का घर ढहाने से मलबे में पांच छोटे बच्चे दब गए। शोर मचने पर हाथी भागा और ग्रामीणों ने बच्चों को बाहर निकालकर मझगांव रेफरल अस्पताल पहुंचाया।    इस दौरान बच्चों के चाचा मुंगड़ी पिगुंवा और उनकी पत्नी संध्या को हाथी ने सूंड से पटक कर घायल कर दिया। इसके बाद हाथी ने पाण्डुकी टोला में धावा बोला, जहां बुजुर्ग ऊचबा गोप दीवार गिरने से घायल हो गए।    हाथी ने प्रदीप हेंब्रम और हरिश विरुवा के घरों को भी तोड़ा और वहां रखा अनाज चट कर गया। हाथियों के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं।   
चाईबासा में मुआवजे को लेकर लोगों में आक्रोश

दूसरी ओर, टोंटो प्रखंड के नीमडीह गांव में हाथियों द्वारा किए जा रहे नुकसान को लेकर ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। बुधवार को आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष जान मिरन मुंडा और जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया ने प्रभावितों से मुलाकात की।ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा दिया जा रहा 20 किलो चावल ऊंट के मुंह में जीरा समान है। बैठक में निर्णय लिया गया कि 23 जनवरी को वन विभाग की लापरवाही के खिलाफ चाईबासा स्थित DFO कार्यालय के समक्ष एकदिवसीय धरना दिया जाएगा।   
मुआवजे की राशि पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

मजदूर नेता जान मिरन मुंडा ने झारखंड सरकार की मुआवजा नीति की तुलना पड़ोसी राज्य से करते हुए कहा कि ओडिशा में हाथी हमले में मौत पर 10 लाख रुपये मिलते हैं, जबकि झारखंड में यह राशि काफी कम है। उन्होंने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग की उदासीनता के कारण ग्रामीणों की जान जोखिम में है।

ग्रामीणों ने मांग करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को तत्काल उचित और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए। पाण्डुकी और प्रभावित गांवों में हाथियों को दूर रखने के लिए हाई-मास्ट/स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं।

साथ ही, हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ने के लिए वन विभाग की टीम को स्थायी रूप से तैनात किया जाए। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वे जनांदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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