अपील में देरी पर पटना हाई कोर्ट सख्त, अफसरों से वसूली का आदेश; नीतीश सरकार पर 5000 का जुर्माना
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/Patna-High-Court-1769004971507.webpअपील में देरी पर पटना हाई कोर्ट सख्त, अफसरों से वसूली का आदेश
विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने अपील में हुई 40 दिनों की देरी और प्रशासनिक शिथिलता पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार पर पांच हजार का अर्थदंड लगाया है।
न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद और न्यायाधीश प्रवीण कुमार की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि समयबद्ध तरीके से कानूनी कार्यवाही न करना न केवल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है, बल्कि सरकारी मशीनरी की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
कोर्ट के समक्ष दायर अंतरिम आवेदन में अपील दाखिल करने में 40 दिनों की देरी को माफ करने का अनुरोध किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रारंभिक स्तर पर संबंधित अधिकारियों ने लगभग 72 दिनों तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
साथ ही, अपील का मसौदा तैयार होने के बाद भी सक्षम अधिकारी को हलफनामा शपथ के लिए प्रस्तुत करने में अनावश्यक रूप से 1 माह 5 दिन का समय लगा।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि सीमावधि जैसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं के प्रति अधिकारियों की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, यह देखते हुए कि मामला दोषमुक्ति के विरुद्ध अपील से जुड़ा है, अदालत ने 5,000 रुपये की लागत के साथ देरी को माफ कर दिया।
इस राशि को पटना हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही, खंडपीठ ने जिलाधिकारी, पटना को आदेश दिया कि देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि भविष्य में जिला अदालतों के निर्णयों में निर्णय अपलोड करने की तिथि अनिवार्य रूप से अंकित की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इस संबंध में पटना हाई कोर्ट की ई-समिति को आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है।
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