यूपी की सड़कें ही बताएंगी उस पर कैसे चलें वाहन, लोक निर्माण विभाग करेगा ये बड़ा बदलाव
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/17_11_2022-doon1_23208835_223640851-1769010200918.webpप्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, लखनऊ। पीडब्ल्यूडी के विश्वैश्वरैया सभागार में सोमवार को जब एलईडी स्क्रीन पर प्रेशर हार्न बजाते निजी बस राजधानी के अयोध्या रोड पर दौड़ती दिखाई गई तो परिवहन अफसर अवाक रह गए, क्योंकि विभागीय अफसर छिटपुट इनफोर्समेंट को कड़ी व बड़ी कार्रवाई मानकर अवैध वाहनों का संचालन रोकने का दावा करते आ रहे हैँ।
परिवहन ही नहीं लोक निर्माण विभाग के अफसरों को भी समझाया गया कि सड़कों को दुरुस्त करिए, सही से जगह-जगह संकेतक लगाइए, अब सड़कें ही बताएं कि उस पर कैसे वाहन चल सकते हैं।
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता व दक्षता को विकसित करने के लिए परिवहन विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला का निष्कर्ष यही रहा कि सड़क के अनुसार वाहनों का आवागमन कराना होगा। सड़क किनारे लगे संकेतक और स्पीड लिमिट के अनुसार वाहन चलें।
इंस्टीट्यूट आफ रोड ट्रैफिक एजूकेशन के अध्यक्ष डा. रोहित बलूजा ने कहा था कि पेडेस्ट्रियन पाथ व चौराहों पर लगे सिग्नल का सही से पालन होने पर ही दुर्घटनाएं रुक सकेंगी, अन्यथा दुनिया के 170 देशों से अधिक सड़क दुर्घटनाएं यूपी में ही होती रहेंगी।
डा. बलूजा ने कहा कि चार पहिया वाहन में सीट बेल्ट का उपयोग करना इसलिए जरूरी है क्योंकि कई घटनाओं में पीछे के यात्री के तेजी से अगली सीट पर टकराने की वजह से मौतें हो चुकी हैं। अगली सीट पर बैठा यात्री भी उसका उपयोग करें ताकि वह भी सुरक्षित रह सके।
दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट लगाना न भूलें भले ही घर के आसपास ही जा रहे हों। इसे आदत में शामिल करने पर परेशानी नहीं होगी और खुद सुरक्षित रहकर सड़क को भी सुरक्षित रख सकेंगे। कार्यशाला में निजी बसों में नियम लागू न होने, मनमाने तरीके से यात्री बैठाने व बस के आपातकालीन द्वार के सामने यात्रियों के बैठने जैसी गंभीर खामियां अफसरों को दिखाया।
परिवहन विभाग, लोक निर्माण व यूपीडा के प्रदेशभर के 150 अधिकारी कर्मचारियों ने शपथ लेने के साथ प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र भी हासिल किया है। इसका अमल कितना होगा यह सबसे महत्वपूर्ण है। अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन संजय कुमार सिंह ने कहा, कार्यशाला से मिली सीख को कार्यरूप में उतारने का निर्देश सभी को दिया गया है। साथ ही घटनाओं की जांच का तरीका अब बदलेगा।
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