केरल, तमिलनाडु के बाद कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी विधानसभा को संबोधित करने से किया इनकार!
हाल ही में राज्यपालों के विधानसभा को संबोधित करने को लेकर कई विवाद सामने आए हैं, अब इसी कड़ी में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने गुरुवार को विधानसभा को संबोधित करने से इनकार कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद कर्नाटक सरकार ने कहा कि कानून मंत्री के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार शाम 5.45 बजे राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात करेगा। गहलोत के इनकार के कारण अभी साफ नहीं हैं।कर्नाटक विधानसभा का संयुक्त सत्र, जो 22 से 31 जनवरी तक चलने वाला है, राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू होना था। सत्र के तनावपूर्ण रहने की आशंका थी, जिसमें सत्ताधारी कांग्रेस और BJP-JD(S) विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना थी।
इस विवाद के एक बड़ा मुद्दा केंद्र सरकार का महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, या VB-G RAM G अधिनियम से बदलने का निर्णय है।
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तमिलनाडु से केरल तक ऐसा ही हुआ
कर्नाटक की स्थिति एक दिन पहले केरल विधानसभा में हुए तनावपूर्ण घटनाक्रम के बाद पैदा हुई है। मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के भाषण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मंत्रिमंडल की ओर से अप्रूव भाषण के कुछ अंश छोड़ दिए गए हैं और कुछ अंश जोड़ दिए गए हैं।
विजयन के अनुसार, हटाए गए अनुच्छेदों में केंद्र सरकार की वित्तीय नीतियों की आलोचना की गई थी और केरल विधानसभा की ओर से पारित उन विधेयकों का जिक्र किया गया था, जो लोक भवन में लंबित हैं। अध्यक्ष ने फैसला सुनाया कि केवल मंत्रिमंडल की ओर से अप्रूव भाषण को ही आधिकारिक स्पीच माना जाएगा।
तमिलनाडु में भी इसी तरह का टकराव देखने को मिला, जहां राज्यपाल आर एन रवि ने राज्य सरकार का संबोधन पढ़ने से इनकार कर दिया और कार्यवाही के दौरान आपत्ति जताते हुए विधानसभा से बाहर चले गए।
सदन के अंदर, स्थिति के कारण तीखी बहस हुई, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष एम अप्पावु ने राज्यपाल से विधानसभा के स्थापित नियमों और परंपराओं का पालन करने का आग्रह किया।
Tamil Nadu Governor R.N. Ravi: राज्यपाल आर.एन. रवि ने पहले ही दिन विधानसभा से किया वॉकआउट, राष्ट्रगान के अपमान का दिया हवाला
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