UP Corruption Case: डेढ़ लाख की घूस लेते चकबंदी अधिकारी धीरेंद्र शुक्ला रंगे हाथ गिरफ्तार, इस वजह से मांगी थी रिश्वत
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/21/article/image/Chitrakoot-Bribe-Case-1769015558231.webpआरोपित चकबंदी अधिकारी धीरेंद्र शुक्ला।
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) झांसी की टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए चकबंदी अधिकारी कर्वी धीरेंद्र शुक्ला को डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। विजिलेंस टीम ने शिकायत का परीक्षण और गोपनीय जांच पूरी करने के बाद यह ट्रैप कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपित अधिकारी को लेकर कर्वी कोतवाली पहुंची, जहां उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
शिकायतकर्ता ने विजिलेंस झांसी में शिकायत दर्ज कराई थी कि चकबंदी अधिकारी कर्वी के न्यायालय में लाल प्रताप आदि बनाम सत्यनारायण आदि (मौजा छेछरिहा बुजुर्ग) नामक एक वाद विचाराधीन है। आरोप है कि उक्त वाद में शिकायतकर्ता के पक्ष में आदेश पारित करने के एवज में चकबंदी अधिकारी द्वारा 1.50 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी।
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया कि वह रिश्वत नहीं देना चाहता और अधिकारी को रंगे हाथ पकड़वाना चाहता है। विजिलेंस विभाग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए गोपनीय जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद इंस्पेक्टर पीयूष पांडेय के नेतृत्व में पांच सदस्यीय ट्रैप टीम गठित की गई। बुधवार को टीम चित्रकूट पहुंची और योजना के तहत शिकायतकर्ता को आरोपी अधिकारी के एसडीएम कॉलोनी स्थित आवास पर भेजा गया।
जैसे ही शिकायतकर्ता ने घूस की रकम दी, पहले से मौजूद विजिलेंस टीम ने मौके पर पहुंचकर चकबंदी अधिकारी को रंगे हाथ दबोच लिया। आवश्यक कार्रवाई के बाद टीम आरोपी को लेकर कर्वी कोतवाली पहुंची, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां लगातार जारी रहेंगी। विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा वैध कार्य के बदले रिश्वत मांगी जाए, तो इसकी सूचना विजिलेंस विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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