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MP में मंत्री विजय शाह के बाद अब IAS संतोष वर्मा पर बन सकता है कार्रवाई करने का दबाव

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मंत्री विजय शाह व आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी पर मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई एक पखवाड़े में करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सियासत गरमाई हुई है। कांग्रेस उनके त्यागपत्र की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। वहीं, ब्राह्मण बेटियों को लेकर असभ्य बयान देने वाले आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विरुद्ध भी राज्य सरकार पर कार्रवाई का दबाव बन सकता है।

दरअसल, विवादित पदोन्नत आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के बयान के बाद शासन ने विभागीय जांच तो प्रारंभ की मगर एफआईआर अब तक नहीं हुई है। इसे लेकर सामाजिक संगठनों द्वारा थानों में आवेदन दिए जा चुके हैं। विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के कुछ विधायक कार्रवाई न होने का मुद्दा उठा सकते हैं। सवर्ण संगठनों ने विधानसभा के घेराव की चेतावनी भी दी है।

संतोष वर्मा ने अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ(अजाक्स) का अध्यक्ष बनने के बाद पहले प्रांतीय अधिवेशन में आरक्षण बरकरार रखने के पक्ष में बात रखते हुए ब्राह्मण बेटियों के लिए असभ्य बयान दे दिया था। इसे लेकर सवर्ण समाज ने आपत्ति जताई। पूरे प्रदेश में प्रदर्शन हुए। पुलिस थानों में एफआईआर के लिए आवेदन दिए गए लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ। पिछले दिनों सर्वणों की सपाक्स पार्टी के संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने भोपाल के टीटी नगर थाने में धरना भी दिया।

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उधर, सवर्ण समाज के संगठन सरकार द्वारा वर्मा को नोटिस देने और विभागीय जांच प्रारंभ करने को केवल रस्म अदायगी मान रहे हैं। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और सजाक्स संगठन बनाने के लिए अधिकृत मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक का कहना है कि जिस तरह का वैमनस्य फैलाने वाला बयान आईएएस संतोष वर्मा ने दिया, वह सेवा शर्तों का सीधा उल्लंघन है। इसे लेकर एफआईआर होनी ही चाहिए। यदि ऐसी कोई बात सवर्ण वर्ग के व्यक्ति द्वारा कही गई होती तो उसके ऊपर अब तक कार्रवाई हो गई होती।

सूत्रों का कहना है कि विधानसभा के बजट सत्र में भाजपा और कांग्रेस के कुछ विधायकों द्वारा इस मुद्दे को उठाया जा सकता है क्योंकि दोनों ही दलों के विधायकों ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव से शीतकालीन सत्र में भेंटकर कार्रवाई करने की मांग की थी। इसके पक्ष में तमाम दस्तावेज भी दिए गए थे। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से भारत सरकार के पाले में गेंद डालकर इतिश्री कर ली गई है लेकिन यह मामला ठंडा होता नजर नहीं आ रहा है।

कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मंत्री विजय शाह के आपत्तिजनक बयान पर जिस तरह सुप्रीम कोर्ट ने रुख अपनाया है, उससे सरकार पर वर्मा के विरुद्ध भी कार्रवाई के लिए दबाव बनना निश्चित है। उधर, भाजपा नेताओं का एक बड़ा वर्ग मानता है कि यदि संतोष वर्मा पर कार्रवाई नहीं हुई तो देश के कई राज्यों में ब्राह्मण वर्ग भाजपा से नाराज हो सकता है। इसके दुष्परिणाम कई राज्यों में देखने को मिल सकते हैं।
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