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चाईबासा में फिर एक ही परिवार के तीन सदस्य HIV पॉजिटिव, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

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चाईबासा सदर अस्पताल पहुंची स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की जांच टीम।


जागरण संवाददाता, चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल से लापरवाही की एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने आई है। यहां एक ही परिवार के तीन सदस्य महिला, उसका पति और बड़ा बेटा एचआईवी (HIV) पॉजिटिव पाए गए हैं।    प्राथमिक जांच में अंदेशा जताया जा रहा है कि यह संक्रमण अस्पताल में रक्त चढ़ाने (Blood Transfusion) के दौरान फैला है। मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड के स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह ने छह सदस्यीय राज्यस्तरीय टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए हैं।   
क्या है पूरा मामला?

जांच में सामने आया कि जनवरी 2023 में महिला की पहली डिलीवरी के दौरान उसे सदर अस्पताल में दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया था। अब जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संक्रमण का स्रोत क्या था।

[*]    ब्लड डोनर की तलाश: महिला को जिन दो डोनरों का रक्त मिला था, उनमें से एक की रिपोर्ट \“नेगेटिव\“ पाई गई है। वहीं, दूसरे डोनर      से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि उसकी जांच कर संक्रमण की पुष्टि की जा सके।
[*]    परिवार प्रभावित: महिला के साथ-साथ उसका पति और बड़ा बेटा भी संक्रमित पाया गया है। महिला ने इसी साल जनवरी में दूसरे          बच्चे को जन्म दिया है, जिसकी रिपोर्ट का अभी इंतजार है।


राज्यस्तरीय टीम ने की गहन जांच बुधवार को स्वास्थ्य सचिव के निर्देश पर उप स्वास्थ्य निदेशक डॉ. एलआर पाठक के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम चाईबासा सदर अस्पताल पहुंची। टीम ने लगभग दो घंटे तक ब्लड बैंक के कागजात खंगाले, रिपोर्ट की समीक्षा की और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की।   स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा है कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि अस्पताल की लापरवाही सिद्ध होती है, तो दोषियों के खिलाफ बर्खास्तगी जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।    इस घटना ने राज्य में राजनीतिक हलचल भी तेज कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला।    उन्होंने कहा कि चाईबासा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक पहले भी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित रक्त देने के मामले में विवादों में रहा है। मरांडी ने चेतावनी दी कि अगर इसकी निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो कई और मासूम इसका शिकार हो सकते हैं।    उन्होंने मामले की CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार निजी अस्पतालों से करार करने में व्यस्त है, जबकि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।   
पुराना दाग: पिछले साल भी हुआ था संक्रमण


गौरतलब है कि चाईबासा सदर अस्पताल का रिकॉर्ड इस मामले में पहले भी खराब रहा है। पिछले साल थैलेसीमिया पीड़ित पांच बच्चों में एचआईवी संक्रमण पाया गया था, जिसके बाद तत्कालीन सिविल सर्जन सहित दो डॉक्टरों को निलंबित किया गया था और एक लैब टेक्नीशियन को बर्खास्त किया गया था।
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