जमुआरी नदी का होगा जीर्णोद्धार, बूढ़ी गंडक से होगी कनेक्टिविटी; 33 जगहों पर बनेगा 2 लेन का पुल
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/Jamuari-River-Revival-1769035128316.webpसूख चुकी सकरा प्रखंड होकर बहने वाली जमुआरी नदी। फोटो जागरण
बाबुल दीप, मुजफ्फरपुर। बागमती-बूढ़ी गंडक नदी जोड़ो परियोजना के बाद अब सकरा प्रखंड होकर बहने वाली मृतप्राय जमुआरी नदी को पुनर्जीवित किया जाएगा। इसका जीर्णोद्धार किया जाएगा। इससे इसकी कनेक्टिविटी बूढ़ी गंडक से हो जाएगी। इससे नदी को पुनर्जीवन के साथ हजारों किसानों को लाभ मिलेगा। इसकी कवायद शुरू कर दी गई है।
प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जमुआरी नदी से गाद सफाई की घोषणा की थी। अब बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल दलसिंहसराय ने इसके जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि अभी प्रारंभिक फेज में यह योजना है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने सकरा सीओ को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है।
बताया गया कि जमुआरी नदी हरसिंगपुर गांव के पास ढोली स्लूस से 54 किलोमीटर समस्तीपुर जिला तक इसके तल में जमी गाद की सफाई की जानी है। साथ ही इस नदी के मार्ग में 33 जगहों पर दो लेन का पुल बनाया जाएगा। इसे लेकर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ेगी। कार्यपालक अभियंता ने सकरा सीओ से भू-अर्जन प्लान से संबंधित पूरा ब्योरा भेजा है।
बताया कि जमुआरी नदी के विभिन्न भागों में भू-अर्जन किया जाना है। इसे लेकर पूरा ब्योरा अंचलाधिकारी को सौंप दिया है। उन्होंने मौजावार खतियान व सरकारी भूमि की सत्यापित कापी उपलब्ध कराने को कहा है ताकि आगे की प्रक्रिया तेजी से की जा सके। इसकी जानकारी डीएम व जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को भेजी है।
भू-जल स्तर में भी होगा सुधार
बताया गया कि जमुआरी नदी सकरा, पूसा, ताजपुर, मोरवा व सरायरंजन प्रखंडों से होकर बहती है। अंत में नून व बलान नदी में मिल जाती है। नदी के पुनर्जीवन से सकरा व आसपास के गांवों में सिंचाई और भू-जल स्तर में सुधार होगा। इससे गर्मी के दिनों में पेयजल की समस्या से भी निजात मिलेगी। सकरा में गर्मी का मौसम आते ही भू-जल स्तर बहुत नीचे चला जाता है। इससे पेयजल की समस्या भी दूर होगी।
दो दशक से अधिक से सूखी है नदी
स्थानीय लोगों की मानें तो कभी जमुआरी नदी सकरा व आसपास के किसानों के लिए वरदान थी। खेतों की सिंचाई का काम इसी नदी से किया जाता था। उस समय बूढ़ी गंडक से इसकी कनेक्टिविटी थी। धीरे-धीरे नदी में जलकुंभी उगने लगी और नदी में गाद जमा होना शुरू हो गई। करीब दो दशक पहले यह नदी सूख गई। बूढ़ी गंडक से भी इसके कनेक्टिविटी टूट गई और अब यह बूंद-बूंद के लिए तरस रही है।
बागमती-बूढ़ी गंडक नदी जोड़ो परियोजना पर चल रहा काम
बागमती-बूढ़ी गंडक नदी जोड़ो परियोजना राज्य की एक प्रमुख जल प्रबंधन परियोजना है। इसका उद्देश्य शिवहर के बेलवा घाट से बागमती नदी के अतिरिक्त पानी को एक लिंक चैनल (बेलवा-मीनापुर) के जरिए मुजफ्फरपुर के पास बूढ़ी गंडक में डायवर्ट करना है। इससे बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई में सुधार व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलगी। यह राज्य की पहली नदी जोड़ो परियोजना है जो बाढ़ प्रभावित उत्तर बिहार के शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण व मुजफ्फरपुर जिलों को लाभ पहुंचाएगी। शिवहर जिले के बेलवा घाट से मीनापुर के पास तक करीब 68.80 किमी लंबा चैनल बनाया जा रहा है।
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